श्रीगंगानगर का ‘गौरेया हाउस’: एक परिवार बचा रहा विलुप्त होती चिड़ियों की दुनिया
Trend2in News Desk से राकेश खुडिया | श्रीगंगानगर श्रीगंगानगर का ‘गौरेया हाउस’: जहां आज भी गूंजती है नन्हीं चिड़ियों की चहचहाहट, एक परिवार बना हजारों पक्षियों का सहारा राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, ऊंची इमारतों और कंक्रीट के जंगलों के बीच एक ऐसा घर भी है जहां आज भी सुबह की शुरुआत नन्हीं गौरेया की चहचहाहट से होती है। यह घर केवल एक मकान नहीं बल्कि पक्षियों के लिए सुरक्षित आशियाना बन चुका है। सत्यम नगर में रहने वाले दीवान चंद सिंगाठिया और उनका परिवार पिछले कई वर्षों से गौरेया संरक्षण की ऐसी मुहिम चला रहा है जिसने पूरे इलाके में एक अलग पहचान बना ली है। एक समय था जब भारतीय घरों में गौरेया आम दिखाई देती थी। सुबह होते ही घरों के आंगन, छत और खिड़कियों पर चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती थी। कच्चे मकानों की दीवारों में बने आले, लकड़ी की छतें और खुला वातावरण गौरेया के लिए सुरक्षित घर का काम करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ आधुनिक निर्माण शैली ने इस छोटी चिड़िया का जीवन मुश्किल बना दिया। आज अधिकांश घर पूरी तरह बंद डिजाइन में बनते हैं। मार्बल, टाइल्स और सीमे...