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3 साल की मासूम से छेड़छाड़, मुकदमा दर्ज

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राजस्थान में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना। 3 साल की मासूम 9 घंटे तक लापता रही। आखिरकार पुलिस ने उसे बेड बॉक्स से सुरक्षित बाहर निकाला। 3 साल की बच्ची बेड बॉक्स में मिली, 9 घंटे बाद खुला राज कोटपूतली (राजस्थान)। जिले के एक गांव में शुक्रवार को मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। घर के बाहर खेल रही 3 वर्षीय बच्ची अचानक लापता हो गई। करीब 9 घंटे बाद पुलिस ने उसे पड़ोस में रहने वाले एक युवक के घर से सुरक्षित बरामद किया। बच्ची को कमरे में बने बेड के बॉक्स में बंद किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कैसे हुई वारदात पुलिस के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला 35 वर्षीय युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने उसके साथ छेड़छाड़ की और वारदात छिपाने के लिए उसे बेड बॉक्स में बंद कर दिया। 9 घंटे तक तलाश में जुटी पुलिस बच्ची के अचानक गायब होने से परिवार में हड़कंप मच गया। आसपास खोजबीन के बाद भी सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर...

ईरान–इजरायल युद्ध LIVE : मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर

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LIVE: मिडिल ईस्ट संकट | ईरान-इजरायल तनाव | वैश्विक प्रतिक्रिया Last Updated: 18 जून 2026 | समय: 11:05 PM भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्र सरकार की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच स्पष्ट नीति की मांग की जा रही है। सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं हुआ है। ईरान का आधिकारिक बयान ईरान के राष्ट्रपति ने हालिया घटनाओं को गंभीर बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। अमेरिका की चेतावनी अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व क्षेत्र में रह रहे अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ओमान की खाड़ी की घटना ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। जांच एजेंसियां मामले की पुष्टि और जांच में जुटी हैं। वैश्विक बाजार पर असर विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। Last Updated: 2 जनवरी 2026 | समय: 12:45 PM 🔴 LIVE WAR UPDATE: मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर | ड्रोन वीडियो जारी | भारत ...

Afghanistan–Pakistan Conflict: ‘ओपन वॉर’ बयान के बाद फिर सुलगा ड्यूरंड लाइन विवाद, 130 साल पुराना मुद्दा क्यों बना आज का बड़ा संकट?

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  Afghanistan–Pakistan Conflict: ‘ओपन वॉर’ बयान के बाद फिर सुलगा ड्यूरंड लाइन विवाद, 130 साल पुराना मुद्दा क्यों बना आज का बड़ा संकट? दक्षिण एशिया में एक बार फिर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव तेज होता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में सख्त बयानबाज़ी, सीमा पार सैन्य कार्रवाई के दावे और जवाबी कदमों ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। दोनों देशों के बीच खिंची ड्यूरंड लाइन दशकों से विवाद का केंद्र रही है, लेकिन अब इसमें आतंकवाद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), शरणार्थी संकट, सीमा पर बाड़ और क्षेत्रीय राजनीति जैसे कई नए आयाम जुड़ चुके हैं। मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यह केवल सीमाई विवाद नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा, कूटनीति और आंतरिक राजनीति से जुड़ा बहुस्तरीय संघर्ष बन चुका है। ताजा घटनाक्रम: सख्त बयान और सीमा पर तनाव हाल में पाकिस्तान की ओर से आए कड़े बयान ने स्थिति को और गर्म कर दिया। सीमा पार आतंकी हमलों के आरोपों के बीच सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए गए। अफगानिस्तान ने भी जवाब में कहा कि उसकी जमीन किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी और सीमा पर किसी भी आक्रामक क...

दिल्ली आबकारी केस में बड़ा फैसला: केजरीवाल और सिसोदिया बरी

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 दिल्ली आबकारी केस में बड़ा फैसला:  केजरीवाल और सिसोदिया बरी कोर्ट ने कहा– ‘कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं’ नई दिल्ली | दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा देने वाले आबकारी नीति मामले में बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। शुक्रवार, 27 फरवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुल 23 आरोपियों को राहत देते हुए मामले को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि “प्रथम दृष्टया किसी भी आरोपी के खिलाफ मामला नहीं बनता।” यह फैसला ऐसे समय आया है जब यह केस राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहा है और कई महीनों से सियासी बहस का विषय बना हुआ था। ⚖️ कोर्ट ने क्या कहा? विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सरकारी गवाह के बयानों के आधार पर आरोप तय करना उचित नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब आरोपों की बुनियाद ही कमजोर हो। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि इस प्रकार के आचरण को स्वीकार किया जाता है, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। अदालत ने...

युद्ध का ऐलान: ‘ओपन वॉर’ बयान से दक्षिण एशिया अलर्ट

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  इस्लामाबाद/काबुल। दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात अचानक गंभीर हो गए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सीमा तनाव के बीच कथित एयरस्ट्राइक और सख्त बयानों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से आए ‘ओपन वॉर’ जैसे शब्दों ने भू-राजनीतिक समीकरणों को झकझोर दिया है। सवाल यह है—क्या यह सीमित सैन्य कार्रवाई है या हालात बड़े टकराव की ओर बढ़ रहे हैं? क्या है ताजा घटनाक्रम? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान के कुछ सीमावर्ती इलाकों में विस्फोट और हवाई गतिविधि देखी गई। पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया कि यह कार्रवाई “सुरक्षा हितों” के तहत की गई। दूसरी ओर, अफगान तालिबान प्रशासन ने इन हमलों को “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया है। पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के बयान में कहा गया कि देश अपनी सुरक्षा के लिए “हर जरूरी कदम” उठाएगा। इस बयान को कई विश्लेषक कड़े संदेश के रूप में देख रहे हैं। हालांकि अब तक किसी औपचारिक युद्ध घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। सीमा विवाद और पुराना तनाव पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच ड्यूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। पाकिस्तान बार-बार ...

पाकिस्तान का ‘खुली जंग’ ऐलान? दक्षिण एशिया में बढ़ा तनाव

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  इस्लामाबाद/काबुल। दक्षिण एशिया में तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। अफगानिस्तान में कथित हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान की ओर से आए सख्त बयान ने पूरे क्षेत्र को अलर्ट मोड पर ला दिया है। सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के ठिकानों पर कार्रवाई की है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और बिगड़ गए हैं। सवाल उठ रहा है — क्या यह सीमित सैन्य कार्रवाई है या हालात ‘खुली जंग’ की ओर बढ़ रहे हैं? क्या हुआ ताजा घटनाक्रम? रिपोर्ट्स के अनुसार, अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत नंगरहार और सीमावर्ती इलाकों में विस्फोटों और हवाई गतिविधियों की खबरें सामने आईं। कुछ विदेशी मीडिया स्रोतों ने दावा किया कि पाकिस्तान वायुसेना ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि आधिकारिक स्तर पर दोनों देशों की तरफ से बयान सावधानी भरे रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के कड़े बयान ने माहौल को और गंभीर बना दिया। बयान में कहा गया कि “हमारी सहनशीलता की सीमा पूरी हो चुकी है।” इस टिप्पणी को कई विश्लेषक कूटनीतिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। सीमा प...

CBSE में अंग्रेजी अब मुख्य भाषा नहीं

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 CBSE की नई भाषा नीति: अब अंग्रेजी मुख्य भाषा नहीं, 2026-27 से बड़ा बदलाव 🚨 क्या बदलने जा रहा है स्कूलों में? देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी खबर है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026-27 सत्र से कक्षा 6 से नई भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अंग्रेजी अब पहले की तरह “मुख्य भाषा” नहीं मानी जाएगी। छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होंगी। क्या है नया नियम? नई नीति के अनुसार कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। तीसरी भाषा विदेशी हो सकती है। महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अंग्रेजी को अब विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा जाएगा। यानी अंग्रेजी अनिवार्य मुख्य भाषा नहीं रहेगी, बल्कि फ्रेंच, जर्मन या अन्य विदेशी भाषाओं की तरह एक विकल्प के रूप में पढ़ी जा सकेगी। इसका मतलब है कि स्कूल अब अंग्रेजी की जगह किसी अन्य भारतीय भाषा को प्राथमिकता दे सकते हैं। छात्रों को अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा को अधिक महत्व देने का अवसर मिलेगा। क्यों लिया गया यह फैसला? शिक्षा विश...

उमर खालिद को जमानत क्यों नहीं? पांच को बेल पर दो को नहीं राहत

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 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आया है। अदालत ने कुछ आरोपियों को जमानत दे दी, लेकिन उमर खालिद को राहत नहीं मिली। आखिर ऐसा क्यों? क्या सबूत अलग हैं, या भूमिका? जानिए इस फैसले के कानूनी और राजनीतिक मायने। दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में अदालत के हालिया फैसले ने एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है। जहां इस मामले में पांच आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, वहीं उमर खालिद को अब तक राहत नहीं मिली है। अदालत का यह निर्णय केवल एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके कानूनी और राजनीतिक मायने भी व्यापक हैं। उमर खालिद पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके भाषणों और गतिविधियों का संबंध कथित साजिश से था। अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है। दूसरी ओर, जिन पांच आरोपियों को जमानत मिली, उनके मामलों में अदालत ने अलग-अलग परिस्थितियों, साक्ष्यों की प्रकृति और व्यक्तिगत भूमिकाओं का उल्लेख किया। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि...

चीन के पड़ोस में अमेरिकी खनन

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  बलूचिस्तान में 1.3 अरब डॉलर का निवेश एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अमेरिका ने 1.3 अरब डॉलर के निवेश के साथ खनन क्षेत्र में बड़ी एंट्री की है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब चीन पहले से ही पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के जरिए भारी निवेश कर चुका है। ऐसे में विशेषज्ञ इसे चीन के प्रभाव क्षेत्र में अमेरिका की सीधी रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। यहां तांबा, सोना और दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं। अमेरिका का निवेश विशेष रूप से रेको डिक परियोजना और ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ जैसे रणनीतिक खनन उपक्रमों से जुड़ा माना जा रहा है। रेको डिक दुनिया की सबसे बड़ी तांबा-और-सोना खदानों में से एक मानी जाती है। यह परियोजना लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक विवादों में फंसी रही थी, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी से इसे फिर गति मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। अमेरिका वैश...

Rajasthan panchayat election: दो से अधिक संतानों वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव

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  जयपुर। क्या अब दो से ज्यादा बच्चों वाले भी राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव लड़ सकेंगे? राज्य सरकार ने इस सवाल का जवाब दे दिया है। कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक और राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों पर चुनाव लड़ने की लगी रोक हट जाएगी। राजस्थान की राजनीति में यह निर्णय एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वर्षों से लागू दो-संतान नियम के तहत जिन लोगों को पंचायत और शहरी निकाय चुनावों से वंचित रखा गया था, उन्हें अब चुनावी मैदान में उतरने का अवसर मिल सकेगा। कैबिनेट का बड़ा फैसला कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने दोनों संशोधन विधेयकों को स्वीकृति दे दी है। इन्हें वर्तमान विधानसभा सत्र में पेश कर पारित कराया जाएगा। विधेयक पारित होते ही यह प्रावधान प्रभावी हो जाएगा। राज्य में पहले दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। यह नियम जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि समय के साथ इस प्रावधान को लेकर विभिन्न स्तरो...

विनम्र श्रद्धांजलि: कामरेड हेतराम बेनीवाल

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  विनम्र श्रद्धांजलि: कामरेड स्व. श्री हेतराम जी बेनीवाल  “माइक की जरूरत नहीं थी उन्हें… श्रीगंगानगर। कुछ आवाजें वक्त के साथ धीमी पड़ जाती हैं, लेकिन कुछ आवाजें इतिहास बन जाती हैं। कामरेड हेतराम बेनीवाल उन्हीं आवाजों में से एक थे। 94 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ राजस्थान की जनसंघर्ष राजनीति का एक जीवंत अध्याय मानो ठहर गया है। वे सिर्फ एक पूर्व विधायक नहीं थे, वे आंदोलन की धड़कन थे। कहा जाता है कि उन्हें कभी माइक्रोफोन की जरूरत नहीं पड़ी। हजारों की भीड़ के बीच खड़े होकर वे जिस आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ बोलते थे, वह उनके विचारों की शक्ति का प्रमाण था। उनकी आवाज में आक्रोश नहीं, आस्था थी — व्यवस्था बदलने की आस्था, समाज को न्याय दिलाने की आस्था। साधारण जीवन, असाधारण प्रतिबद्धता 10 जून 1934 को पंजाब के सुखचैन में जन्मे हेतराम बेनीवाल ने सादगी को जीवन का आधार बनाया। बीकानेर के डूंगर कॉलेज से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने कृषि को अपना व्यवसाय चुना। लेकिन उनका मन खेत की मेड़ों से आगे, किसान के अधिकारों की लड़ाई में लगा रहा। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सव...

कामरेड हेतराम बेनीवाल का निधन: 94 वर्ष की आयु में अंतिम सांस

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94 वर्ष की आयु में पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल का निधन, किसान आंदोलनों की बुलंद आवाज हुई शांत राजस्थान की राजनीति और किसान आंदोलनों में चार दशकों तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ वामपंथी नेता एवं नौवीं राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य कामरेड हेतराम बेनीवाल का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। श्रीगंगानगर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। श्रीगंगानगर। जनसंघर्षों की राजनीति करने वाले कामरेड हेतराम बेनीवाल का जीवन सादगी, वैचारिक प्रतिबद्धता और किसान-मजदूर हितों की निरंतर लड़ाई का प्रतीक रहा। उनके निधन को प्रदेश की वामपंथी राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। साधारण पृष्ठभूमि से संघर्षशील नेतृत्व तक 10 जून 1934 को पंजाब के सुखचैन में जन्मे हेतराम बेनीवाल, श्री रामप्रताप बेनीवाल के पुत्र थे। उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। कृषि उनका मुख्य व्यवसाय रहा, लेकिन उनका जीवन किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार...

पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन

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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की। खबर फैलते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली नाम रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल हो गए। पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी के रूप में वे लंबे समय तक पार्टी की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे। केंद्र सरकार में रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में रेलवे के आधुनिकीकरण और पूर्वी भारत में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वे संगठन कौशल और रणनीतिक सोच के लिए जाने जाते थे। साल 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्...