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एपस्टीन फाइल्स में नॉर्वे की राजकुमारी का नाम

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  एपस्टीन फाइल्स में नॉर्वे की राजकुमारी का नाम, • ईमेल रिकॉर्ड पर मचा बवाल वॉशिंगटन | 6 फ़रवरी 2026 राकेश खुडिया  जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों और ईमेल रिकॉर्ड सामने आने के बाद नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट का नाम चर्चा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन फाइल्स में प्रिंसेस का नाम कई बार दर्ज है और वर्ष 2011 से 2014 के बीच दोनों के बीच ईमेल संवाद होने की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एक ईमेल में मेटे-मारिट ने एपस्टीन के संपर्क को लेकर असहजता जताई थी। फाइल्स सार्वजनिक होने के बाद प्रिंसेस मेटे-मारिट ने एक बयान में एपस्टीन से किसी भी तरह के संबंध पर खेद जताया है। हालांकि, अब तक किसी भी जांच एजेंसी ने प्रिंसेस के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप तय नहीं किया है। मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और शाही हलकों में चर्चा तेज हो गई है। ये भी पढ़ें:  एपस्टीन फाइलें क्या हैं? 6 मिलियन दस्तावेज़ों का सच

WHO से अलग हुआ अमेरिका

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WHO से अलग हुआ अमेरिका वॉशिंगटन/जिनेवा। अमेरिका ने आधिकारिक रूप से World Health Organization (WHO) की सदस्यता से खुद को अलग कर लिया है। यह फैसला Donald Trump प्रशासन के उस रुख का हिस्सा रहा, जिसमें WHO की कार्यप्रणाली और कोविड-19 महामारी से निपटने के तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। अमेरिकी प्रशासन का आरोप रहा कि WHO कोरोना महामारी को समय रहते प्रभावी ढंग से संभालने में विफल रहा और उसने अमेरिका के हितों के विपरीत काम किया। इसी आधार पर अमेरिका ने न केवल सदस्यता से नाम वापस लिया, बल्कि संगठन को दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी रोक दी। जानकारी के अनुसार WHO पर अमेरिका का लगभग 2380 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया है, जिसे चुकाने से भी अमेरिका ने इनकार कर दिया। इस निर्णय के बाद वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, वैक्सीन वितरण और महामारी से निपटने की अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका जैसे बड़े दाता देश का WHO से अलग होना वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं कई देशों ने इसे बहुपक्षीय सहयोग के लिए झटका बताया है...