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रायसिंहनगर में महावीर हनुमान जयंती पर भव्य शोभायात्रा: सैकड़ों महिलाएं कलश यात्रा में शामिल, झांकियां बनी आकर्षण

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 Trend2in News Desk | रायसिंहनगर, 28 मार्च (रमेश लोटिया) महावीर हनुमान जयंती के पावन अवसर पर रायसिंहनगर शहर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस मौके पर श्री रामनवमी महोत्सव समिति एवं विश्व हिंदू परिषद प्रखंड रायसिंहनगर के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा एवं कलश यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कलश यात्रा में शामिल महिलाओं ने लाल रंग के वस्त्र धारण कर सिर पर कलश सजाए हुए थे, वहीं हाथों में लाल ध्वज लेकर वे शोभायात्रा का हिस्सा बनीं। पुरुष भी सफेद वस्त्र और लाल टोपी पहनकर गले में लाल पटका डालकर शामिल हुए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आकर्षक नजर आ रहा था। शोभायात्रा के दौरान भक्तगण श्रीराम और बालाजी के भजनों पर झूमते-नाचते आगे बढ़ रहे थे। यह शोभायात्रा बड़े हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य बाजार और प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः हनुमान मंदिर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा शोभायात्रा का स्वागत किया गया। शोभायात्रा के दोनों ओर सेवादारों द्वारा ठंडे पानी और जलजीरा की सेवा लगाई गई, जिससे ...

होलाष्टक 2026 तिथि, महत्व और होलिका दहन कब

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रंगों के त्योहार से पहले महत्वपूर्ण जानकारी! होलाष्टक 2026 की शुरुआत हो रही है। जानिए कब से शुरू होंगे ये 8 दिन और क्या है इसका महत्व। होलाष्टक 2026 कब से शुरू? होलाष्टक होली से ठीक 8 दिन पहले शुरू होता है। सनातन परंपरा में इन दिनों को विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इन 8 दिनों के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ होगा। इसके बाद 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलाष्टक की अवधि भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि इन 8 दिनों तक उन्हें अत्याचार सहना पड़ा था, लेकिन उन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग लकड़ियों का ढेर लगाकर अग्नि प्रज्वलित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसके अगले दिन धूलंडी या रंग वाली होली पूरे उत्साह के साथ मनाई जाती है। होलाष्टक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य टालने की परंपरा है। धार्मिक दृष्टि से ये दिन संयम, भक्ति और आत्मच...