Rajasthan panchayat election: दो से अधिक संतानों वाले भी लड़ सकेंगे चुनाव
जयपुर। क्या अब दो से ज्यादा बच्चों वाले भी राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव लड़ सकेंगे? राज्य सरकार ने इस सवाल का जवाब दे दिया है। कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक और राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों पर चुनाव लड़ने की लगी रोक हट जाएगी।
राजस्थान की राजनीति में यह निर्णय एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वर्षों से लागू दो-संतान नियम के तहत जिन लोगों को पंचायत और शहरी निकाय चुनावों से वंचित रखा गया था, उन्हें अब चुनावी मैदान में उतरने का अवसर मिल सकेगा।
कैबिनेट का बड़ा फैसला
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने जानकारी दी कि मंत्रिमंडल ने दोनों संशोधन विधेयकों को स्वीकृति दे दी है। इन्हें वर्तमान विधानसभा सत्र में पेश कर पारित कराया जाएगा। विधेयक पारित होते ही यह प्रावधान प्रभावी हो जाएगा।
राज्य में पहले दो से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। यह नियम जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि समय के साथ इस प्रावधान को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस चलती रही।
क्या बदलेगा अब?
संशोधन लागू होने के बाद:
सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार भाग ले सकेंगे।
नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम चुनावों में भी यही पात्रता लागू होगी।
सरकार का तर्क है कि लोकतंत्र में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। चुनाव लड़ना नागरिक का अधिकार है और इसे सामाजिक स्थिति के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय का आगामी पंचायत और निकाय चुनावों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। कई ऐसे संभावित उम्मीदवार, जो दो-संतान नियम के कारण चुनावी राजनीति से दूर थे, अब सक्रिय हो सकते हैं। इससे ग्रामीण और शहरी राजनीति दोनों में नए समीकरण बन सकते हैं।
विपक्षी दलों ने इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया, तो कुछ ने कहा कि इससे जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को झटका लग सकता है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए शिक्षा, जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अधिक प्रभावी उपाय हैं। चुनावी अयोग्यता जैसी शर्तें लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित करती हैं।
अब नजर विधानसभा सत्र पर है, जहां इन संशोधन विधेयकों को पारित किया जाएगा। पारित होते ही राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की पात्रता शर्तों में बड़ा बदलाव लागू हो जाएगा।
राज्य की राजनीति में यह निर्णय आने वाले समय में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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राकेश खुडिया