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CBSE में अंग्रेजी अब मुख्य भाषा नहीं

 CBSE की नई भाषा नीति: अब अंग्रेजी मुख्य भाषा नहीं, 2026-27 से बड़ा बदलाव


🚨 क्या बदलने जा रहा है स्कूलों में?

देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी खबर है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026-27 सत्र से कक्षा 6 से नई भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अंग्रेजी अब पहले की तरह “मुख्य भाषा” नहीं मानी जाएगी। छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होंगी।

क्या है नया नियम?

नई नीति के अनुसार कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। तीसरी भाषा विदेशी हो सकती है। महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अंग्रेजी को अब विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा जाएगा। यानी अंग्रेजी अनिवार्य मुख्य भाषा नहीं रहेगी, बल्कि फ्रेंच, जर्मन या अन्य विदेशी भाषाओं की तरह एक विकल्प के रूप में पढ़ी जा सकेगी।

इसका मतलब है कि स्कूल अब अंग्रेजी की जगह किसी अन्य भारतीय भाषा को प्राथमिकता दे सकते हैं। छात्रों को अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा को अधिक महत्व देने का अवसर मिलेगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है। NEP में मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र अपनी जड़ों से जुड़े रहें और भारतीय भाषाओं का संरक्षण व विकास हो।

कई शिक्षाविदों का कहना है कि प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होने से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है। इसी सोच के तहत भाषा नीति में यह बदलाव किया गया है।

अभिभावकों और छात्रों की प्रतिक्रिया

इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ अभिभावक इसे भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने वाला सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ को चिंता है कि अंग्रेजी की भूमिका कम होने से वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट कर रहे हैं कि अंग्रेजी पूरी तरह हटाई नहीं जा रही, बल्कि उसे विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। यानी छात्र चाहें तो अंग्रेजी का चयन कर सकते हैं।

स्कूलों पर क्या असर होगा?

नई नीति लागू होने के बाद स्कूलों को भाषा शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यक्रम और संसाधनों में बदलाव करना होगा। क्षेत्रीय भाषाओं की मांग बढ़ सकती है। साथ ही विदेशी भाषाओं के विकल्प भी विस्तारित हो सकते हैं।

आगे क्या?

CBSE की यह नई भाषा नीति 2026-27 सत्र से लागू होगी। आने वाले महीनों में बोर्ड विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।

स्पष्ट है कि यह बदलाव केवल पाठ्यक्रम का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सोच में बड़ा परिवर्तन है। अब देखना होगा कि यह नीति जमीनी स्तर पर किस तरह लागू होती है और छात्रों के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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