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कामरेड हेतराम बेनीवाल का निधन: 94 वर्ष की आयु में अंतिम सांस

94 वर्ष की आयु में पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल का निधन, किसान आंदोलनों की बुलंद आवाज हुई शांत


राजस्थान की राजनीति और किसान आंदोलनों में चार दशकों तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ वामपंथी नेता एवं नौवीं राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य कामरेड हेतराम बेनीवाल का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। श्रीगंगानगर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

श्रीगंगानगर। जनसंघर्षों की राजनीति करने वाले कामरेड हेतराम बेनीवाल का जीवन सादगी, वैचारिक प्रतिबद्धता और किसान-मजदूर हितों की निरंतर लड़ाई का प्रतीक रहा। उनके निधन को प्रदेश की वामपंथी राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

साधारण पृष्ठभूमि से संघर्षशील नेतृत्व तक

10 जून 1934 को पंजाब के सुखचैन में जन्मे हेतराम बेनीवाल, श्री रामप्रताप बेनीवाल के पुत्र थे। उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। कृषि उनका मुख्य व्यवसाय रहा, लेकिन उनका जीवन किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा।

वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े रहे और गंगानगर में प्रांतीय सचिवालय स्तर तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं। जनआंदोलनों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन उनका प्रमुख लक्ष्य था।

विधानसभा में सक्रिय भूमिका

हेतराम बेनीवाल वर्ष 1990 से 1992 तक नौवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे। विधायक रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई।

  • 27 मार्च 1990 से 25 मार्च 1991 तक — सदस्य, राजकीय उपक्रम समिति
  • 19 फरवरी 1991 से — सदस्य, संसदीय परामर्शदात्री समिति
  • वर्ष 1991 — सदस्य, पुस्तकालय समिति
  • 7 अक्टूबर 1991 से 1992 तक — सदस्य, अधीनस्थ विधान संबंधी समिति

विधानसभा में उनका अंदाज स्पष्ट और बेबाक माना जाता था। वे मुद्दों को तथ्यों के साथ रखते थे और ग्रामीण समस्याओं को मजबूती से उठाते थे। उनकी तार्किक शैली और प्रभावशाली वक्तृत्व सदन में अलग पहचान रखता था।

किसान-मजदूर आंदोलनों में अग्रणी भूमिका

1980 से 1990 के बीच विभिन्न किसान और मजदूर आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्होंने लगभग 4-5 वर्ष जेल यात्राएं कीं। वे मजदूर संगठनों में भी सक्रिय रहे और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे।

घड़साना पानी आंदोलन (2004-06) में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे किसानों को एकजुट रहने की शपथ दिलाते थे और अपने प्रभावशाली भाषणों से आंदोलन को जनांदोलन का रूप देने में सफल रहे।

कहा जाता है कि वे बिना माइक्रोफोन के भी हजारों की भीड़ को संबोधित कर लेते थे। उनके तीखे व्यंग्य और चुटीले अंदाज से सभाओं में ऊर्जा भर जाती थी और आंदोलन को नई दिशा मिलती थी।

पारिवारिक और सामाजिक जीवन

उनकी पत्नी श्रीमती चंद्रावल हैं। परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं। उनका स्थायी निवास श्रीगंगानगर के 8, एल.एम.पी., पोस्ट ऑफिस 6 एल.एम.पी. क्षेत्र में रहा।

वे सादगीप्रिय और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में जाने जाते थे। ग्रामीण विकास, जल अधिकार और मजदूर हितों के प्रबल समर्थक रहे।

एक युग का अंत

कामरेड हेतराम बेनीवाल का निधन किसान आंदोलनों और प्रदेश की वामपंथी राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि उनका जाना केवल एक नेता का नहीं, बल्कि संघर्ष और वैचारिक प्रतिबद्धता के एक युग का अंत है।

इसे भी पढ़ें https://trend2in.blogspot.com/2026/02/hetram-beniwal-tribute.htmlविनम्र श्रद्धांजलि कामरेड स्व हेतराम बेनीवाल 


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