रेगिस्तान में “केसर” का सच: श्रीगंगानगर में उगी कुसुम ने तोड़ा भ्रम, किसानों के लिए खुला कमाई का नया रास्ता
रेगिस्तान में “केसर” का सच: कुसुम की खेती से बदली तस्वीर, भ्रम टूटा तो खुला कमाई का नया रास्ता Trend2in News Desk से राकेश खुडिया| रावला (श्रीगंगानगर) राजस्थान की रेतीली धरती पर खेती हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। यहां पानी की कमी, तेज गर्मी और मिट्टी की सीमित उर्वरता के कारण किसान हर सीजन में जोखिम उठाते हैं। सरसों और कपास जैसी पारंपरिक फसलें भी कई बार उम्मीद के अनुसार उत्पादन नहीं देतीं। ऐसे हालात में जब यह खबर सामने आई कि श्रीगंगानगर जिले की रावला तहसील के चक 3 KLM में एक किसान “केसर” उगा रहा है, तो यह चर्चा का विषय बन गया। खेतों में खिले पीले-नारंगी फूलों के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और लोगों ने इसे असली केसर मान लिया। लेकिन जब इस पूरे मामले की गहराई से जांच की गई, तो सामने आया कि यह असली केसर नहीं, बल्कि कुसुम (सफ्लावर) की फसल है। भ्रम की असली वजह क्या है? ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से कुसुम को “अमेरिकन केसर” या “अड़क केसर” कहा जाता है। यही नाम लोगों को भ्रमित कर देता है। देखने में इसके फूल आकर्षक और केसर जैसे लगते हैं, लेकिन असलियत बिल्कुल अलग ह...