बीएड डिग्रीधारी “घर के न घाट के”, लंबा भर्ती कैलेंडर और बार-बार परीक्षाओं से बढ़ी निराशा
Trend2in News Desk से राकेश खुडिया | श्रीगंगानगर | प्रदेश में बीएड (B.Ed) डिग्रीधारियों के बीच बढ़ती निराशा अब खुलकर सामने आने लगी है। “घर के न घाट के” जैसी स्थिति झेल रहे हजारों युवाओं के लिए शिक्षक बनने का सपना लगातार दूर होता जा रहा है। भर्तियों में देरी, परीक्षा प्रक्रिया की जटिलता और सीटों के मुकाबले कम अवसरों ने युवाओं को गहरे संकट में डाल दिया है। बीएड डिग्रीधारी “घर के न घाट के”, लंबा भर्ती कैलेंडर और बार-बार परीक्षाओं से बढ़ी निराशा हाल के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में शिक्षक बनने की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले भर्तियों की रफ्तार बेहद धीमी है। लगभग 1.10 लाख सीटों के लिए अब तक करीब 70 हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं, जबकि अंतिम तिथि अभी बाकी है। इसके बावजूद युवाओं में उत्साह की जगह चिंता और असमंजस का माहौल है। युवाओं का कहना है कि बीएड करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही सरकारी नौकरी का अवसर मिलेगा, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जो पिछले 4-5 वर्षों से लगातार परीक्षाएं दे रहे हैं, फिर भी उन्हें स्थ...