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अफीमची हुए तोते, किसानों के लिए जी का जंजाल

 अफीमची हुए तोते, किसानों के लिए जी का जंजाल



अफीम के खेतों पर इन दिनों अनोखा संकट मंडरा रहा है। डोडों का नशीला रस चखने के बाद तोते बार-बार लौट रहे हैं और किसान भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।

मेवाड़ और हाड़ौती अंचल में बड़ी संख्या में तोतों के झुंड अफीम की फसल पर टूट पड़ रहे हैं। जैसे ही डोडे तैयार होते हैं, तोते उन्हें कुतर कर रस पी जाते हैं। नशे के असर में उनका व्यवहार बदल जाता है। कई बार वे उड़ भी नहीं पाते और खेतों के आसपास गिरते-पड़ते नजर आते हैं।

20 प्रतिशत तक नुकसान

किसानों का कहना है कि फसल पकने के समय तोतों के हमले तेज हो जाते हैं। झुंड के झुंड खेतों में पहुंचते हैं और डोडों को नुकसान पहुंचाते हैं। अनुमान है कि इससे करीब 15 से 20 प्रतिशत तक उपज प्रभावित हो रही है। अधखाए डोडों से गुणवत्ता भी गिर जाती है, जिससे बाजार भाव पर असर पड़ता है।

नशीले रस के आदी

अफीम के डोडों में मौजूद रस तोतों को तेजी से आकर्षित करता है। एक बार स्वाद लगने के बाद वे बार-बार उसी खेत में लौटते हैं। आवाज, शोर या भगाने के प्रयास भी ज्यादा देर असर नहीं करते।

बदल जाता है व्यवहार

नशे में धुत्त तोते कई बार तारों पर उल्टे लटकते या जमीन पर बैठे दिखाई देते हैं। उड़ान कमजोर होने से वे कुत्तों और अन्य शिकारी जीवों का आसान शिकार भी बन रहे हैं।

बचाव के उपाय भी बेअसर

फसल बचाने के लिए किसान पटाखे, ढोल, डरावने पुतले और चमकदार टेप का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन तोते फिर लौट आते हैं। अब कई किसान नायलॉन नेट लगाने लगे हैं। एक हेक्टेयर में जाल लगाने पर लगभग 30 से 35 हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च आ रहा है।

ये कहते हैं किसान

 

"अफीम काश्तकारों का कहना है कि डोडों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। पक्षियों से बचाव के लिए उन्हें अतिरिक्त निवेश करना पड़ रहा है, वरना नुकसान और बढ़ सकता है।"

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