फिल्म निर्माताओं के लिए राहत: अब तेजी से मिल रहा फिल्म सर्टिफिकेट
फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: अब कम समय में मिलेगा सर्टिफिकेट
नई दिल्ली, 13 मार्च 2026: देश में फिल्मों के प्रमाणन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि अब फिल्मों के प्रमाणीकरण में पहले की तुलना में काफी कम समय लग रहा है। डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद फीचर फिल्मों का औसत प्रमाणन समय घटकर लगभग 22 कार्यदिवस रह गया है, जबकि लघु फिल्मों के लिए यह समय केवल 3 कार्यदिवस तक सीमित हो गया है।
कानूनी ढांचे के तहत होता है फिल्म प्रमाणन
सरकार के अनुसार, फिल्मों का प्रमाणन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा किया जाता है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का एक वैधानिक निकाय है। यह प्रक्रिया सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 तथा सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 के तहत संचालित होती है।
फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित करते समय बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि सामग्री देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ न हो। यदि किसी फिल्म की विषयवस्तु इन मानकों का उल्लंघन करती है तो बोर्ड उसमें संशोधन या कट लगाने की सिफारिश कर सकता है।
प्रमाणन के दौरान किन बातों पर ध्यान दिया जाता है
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड फिल्मों की समीक्षा करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं का ध्यान रखता है। इनमें मुख्य रूप से भारत की संप्रभुता और अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता जैसे पहलू शामिल होते हैं।
यदि किसी फिल्म में मानहानि, न्यायालय की अवमानना या किसी अपराध के लिए उकसाने जैसी सामग्री पाई जाती है तो बोर्ड उस फिल्म में संशोधन की सलाह दे सकता है।
पिछले पांच वर्षों में प्रमाणित फिल्मों का आंकड़ा
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में फिल्मों के प्रमाणन की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है।
- 2020-21 में कुल 8,299 फिल्मों को प्रमाणन मिला
- 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 12,719 हो गई
- 2022-23 में 18,070 फिल्मों को प्रमाणित किया गया
- 2023-24 में 17,431 फिल्में प्रमाणित हुईं
- 2024-25 में 15,444 फिल्मों को प्रमाणन प्राप्त हुआ
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि डिजिटल और वीडियो फिल्मों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और फिल्म उद्योग में सामग्री निर्माण का विस्तार हुआ है।
कितनी फिल्मों में किए गए संशोधन
प्रमाणन के दौरान कुछ फिल्मों में संशोधन या कट लगाने की आवश्यकता भी सामने आती है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि कई फिल्मों को संशोधन के साथ प्रमाणन दिया गया।
- 2020-21 : 1475 फिल्मों में संशोधन
- 2021-22 : 1911 फिल्मों में संशोधन
- 2022-23 : 2205 फिल्मों में संशोधन
- 2023-24 : 2440 फिल्मों में संशोधन
- 2024-25 : 3033 फिल्मों में संशोधन
हालांकि प्रमाणन से पूरी तरह अस्वीकृत फिल्मों की संख्या बेहद कम रही है।
प्रमाणन श्रेणियों का विवरण
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में प्रमाणित करता है। पिछले पांच वर्षों में कुल 71,963 फिल्मों को प्रमाणित किया गया है।
- यू (सभी के लिए) : 41,817
- यूए : 28,268
- ए (केवल वयस्कों के लिए) : 1,878
- एस : 0
सिनेमैटोग्राफ नियम 2024 के तहत यूए श्रेणी में आयु आधारित उपश्रेणियां भी लागू की गई हैं, जिससे दर्शकों को सामग्री के अनुरूप मार्गदर्शन मिल सके।
प्रमाणन प्रक्रिया की समय सीमा
सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 के अनुसार फिल्मों के प्रमाणीकरण की अधिकतम समय सीमा 48 कार्यदिवस निर्धारित की गई है। लेकिन ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद प्रक्रिया में तेजी आई है।
अब फीचर फिल्मों के प्रमाणन में औसतन 22 कार्यदिवस का समय लगता है जबकि लघु फिल्मों का प्रमाणन केवल 3 कार्यदिवस में पूरा हो जाता है।
CBFC के निर्णय को चुनौती देने का प्रावधान
यदि किसी फिल्म निर्माता को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के निर्णय से असहमति होती है तो वह न्यायालय में अपील कर सकता है। सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान मौजूद है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षों में कुछ मामलों में बोर्ड के निर्णय को अदालत में चुनौती दी गई है।
- 2021 : 2 मामले
- 2022 : 4 मामले
- 2023 : 1 मामला
- 2024 : 4 मामले
- 2025 : 10 मामले
डिजिटल युग में फिल्म प्रमाणन का महत्व
आज के डिजिटल दौर में फिल्म निर्माण और वितरण के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। OTT प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और डिजिटल वितरण के कारण फिल्मों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रमाणन प्रक्रिया का पारदर्शी और तेज होना बेहद जरूरी हो गया है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को बेहतर सुविधा मिल रही है और प्रमाणन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई है।
फिल्म उद्योग के विशेषज्ञों का भी कहना है कि यदि प्रमाणन प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी रहेगी तो इससे फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और निवेश भी बढ़ेगा।
भविष्य में और सुधार की संभावना
सरकार का लक्ष्य फिल्म प्रमाणन प्रणाली को और अधिक आधुनिक बनाना है। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और समयबद्ध समीक्षा प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रमाणन प्रक्रिया और भी तेज और प्रभावी हो सकती है।
फिल्म उद्योग के विकास के लिए यह आवश्यक है कि सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बना रहे। सरकार का दावा है कि नई प्रणाली इसी संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

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राकेश खुडिया