Climate Change Alert: हिमालय से समुद्र तक बदल रहा भारत का मौसम
भारत में बढ़ रही चरम मौसम की घटनाएं: सरकार की रिपोर्ट में तापमान, समुद्र स्तर और भारी वर्षा को लेकर बड़ा खुलासा
भारत में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से दिखाई दे रहा है। संसद में पेश की गई एक आधिकारिक जानकारी के अनुसार देश में अत्यधिक वर्षा, लू, चक्रवात और अन्य चरम मौसम घटनाओं की निगरानी लगातार की जा रही है। केंद्र सरकार ने बताया कि पिछले कई दशकों में तापमान, समुद्र के स्तर और भारी वर्षा जैसी घटनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए हैं।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सरकार देशभर में चरम मौसम घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रही है और इसके आधार पर जलवायु परिवर्तन से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन किया जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन पर विस्तृत अध्ययन
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने हाल ही में वर्षा और तापमान के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट लंबी अवधि के आंकड़ों पर आधारित है और इसमें भविष्य में चरम मौसम घटनाओं की संभावित स्थिति का भी आकलन किया गया है।
यह अध्ययन “भारतीय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का आकलन” नामक पुस्तक में प्रकाशित किया गया है। इस रिपोर्ट में तापमान वृद्धि, समुद्र स्तर में बदलाव, चक्रवातों की स्थिति और हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा तापमान
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1901 से 2018 के बीच भारत का औसत तापमान लगभग 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
यह वृद्धि मुख्य रूप से ग्रीनहाउस गैसों के कारण हुई है। हालांकि मानवजनित एरोसोल और भूमि उपयोग में परिवर्तन जैसे कुछ कारकों ने इस प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार हाल के 30 वर्षों में सबसे गर्म दिन और सबसे ठंडी रात के तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
समुद्र के स्तर में भी तेजी से वृद्धि
वैश्विक तापमान में वृद्धि का असर समुद्र के स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
महाद्वीपीय बर्फ के पिघलने और समुद्री जल के तापीय प्रसार के कारण विश्वभर में समुद्र का स्तर बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी हिंद महासागर में समुद्र स्तर की वृद्धि 1874 से 2004 के बीच लगभग 1.06 से 1.75 मिमी प्रति वर्ष रही।
हालांकि पिछले ढाई दशकों में यह दर बढ़कर लगभग 3.3 मिमी प्रति वर्ष हो गई है।
चक्रवातों के पैटर्न में बदलाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की वार्षिक संख्या में बीसवीं सदी के मध्य से कमी दर्ज की गई है।
हालांकि मानसून के बाद के मौसम में अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफानों की संख्या पिछले दो दशकों में बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण चक्रवातों की तीव्रता और उनके प्रभाव में बदलाव आ रहा है।
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हिमालय में भी दिख रहे बड़े बदलाव
हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में 1951 से 2014 के बीच तापमान में लगभग 1.3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है।
कई क्षेत्रों में हिमपात में कमी और ग्लेशियरों के पीछे हटने की प्रवृत्ति देखी गई है।
हालांकि काराकोरम हिमालय क्षेत्र में सर्दियों के दौरान अधिक हिमपात होने के कारण कुछ ग्लेशियर अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं।
भारी वर्षा और सूखे की घटनाओं में वृद्धि
भारत में चरम वर्षा की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
1950 से 2015 के बीच 150 मिमी प्रति दिन से अधिक वर्षा की घटनाओं में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके साथ ही देश में सूखे की आवृत्ति और उसका भौगोलिक विस्तार भी बढ़ा है।
मौसम पूर्वानुमान क्षमता में सुधार
चरम मौसम घटनाओं से निपटने के लिए सरकार ने कई तकनीकी कदम उठाए हैं।
मानसून मिशन और मिशन मौसम परियोजनाओं के तहत देशभर में अवलोकन और मॉडलिंग प्रणालियों को मजबूत किया गया है।
इसके अलावा डॉप्लर मौसम रडार, स्वचालित मौसम स्टेशन और उन्नत कंप्यूटिंग प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया गया है।
भारत की सुपर कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने अपनी कंप्यूटिंग क्षमता को भी काफी बढ़ाया है।
2025 में “अरुणिका” और “अर्का” नामक उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग सिस्टम लागू किए गए।
इसके बाद कुल कंप्यूटिंग क्षमता बढ़कर 28 पेटाफ्लॉप हो गई है, जो 2014 में 6.8 पेटाफ्लॉप थी।
मौसम चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया गया
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम संबंधी खतरों की निगरानी के लिए एक उन्नत जीआईएस आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली विकसित की है।
यह प्रणाली चक्रवात, भारी वर्षा, लू और अन्य गंभीर मौसम घटनाओं की समय रहते चेतावनी देने में मदद करती है।
सरकार का लक्ष्य है कि मौसम संबंधी चेतावनी देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

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राकेश खुडिया