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Iran War Tension: जोधपुर में होगी IAF की सबसे बड़ी एयर वॉर एक्सरसाइज

 

भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज तरंग शक्ति 2.0 जिसमें कई देशों के फाइटर जेट शामिल होंगे

Defence Desk: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच भारतीय वायुसेना अपनी ताकत और रणनीतिक तैयारी को और मजबूत करने में जुटी है। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना इस साल अपनी सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ आयोजित करने जा रही है। राजस्थान के जोधपुर में होने वाले इस बड़े सैन्य अभ्यास में कई देशों के अत्याधुनिक फाइटर जेट भारतीय विमानों के साथ जटिल हवाई अभ्यास करेंगे।

क्या है ‘तरंग शक्ति’ एयर एक्सरसाइज

तरंग शक्ति भारतीय वायुसेना का अब तक का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास माना जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच समन्वय और रणनीतिक तालमेल को मजबूत करना है। इससे पायलटों को अलग-अलग देशों के विमानों और युद्ध रणनीतियों के साथ प्रशिक्षण का अवसर मिलता है।

जोधपुर में होगा ‘तरंग शक्ति 2.0’

भारतीय वायुसेना ने इस वर्ष के अंत में होने वाले ‘तरंग शक्ति 2.0’ अभ्यास की तैयारी शुरू कर दी है। यह अभ्यास सितंबर-अक्टूबर 2026 के आसपास राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर आयोजित किया जाएगा, जो भारत की पश्चिमी सीमा के काफी करीब स्थित है।

कई देशों के फाइटर जेट होंगे शामिल

इस अभ्यास में भारत के साथ कई मित्र देशों की वायुसेनाएं भी हिस्सा लेंगी। जानकारी के अनुसार फ्रांस के राफेल, यूरोप के यूरोफाइटर टाइफून, अमेरिका के A-10 और F-16 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान इसमें भाग ले सकते हैं।

भारतीय वायुसेना के प्रमुख विमान

इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना अपने प्रमुख लड़ाकू विमानों को भी उतारेगी, जिनमें शामिल हैं: ► राफेल
► सुखोई Su-30MKI
► मिराज 2000
► तेजस
► मिग-29
► जगुआर
► प्रचंड हेलीकॉप्टर

2024 के अभ्यास में क्या हुआ था

‘तरंग शक्ति’ का पहला संस्करण 2024 में दो चरणों में आयोजित किया गया था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस में हुआ था जबकि दूसरा चरण जोधपुर में आयोजित किया गया। इस दौरान फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन की वायुसेनाओं ने हिस्सा लिया था।

इस अभ्यास का महत्व क्या है

तरंग शक्ति केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक भी है। इससे भारत और उसके मित्र देशों के बीच सैन्य सहयोग मजबूत होता है। साथ ही पायलटों को विभिन्न विमानों और युद्ध रणनीतियों के साथ प्रशिक्षण का मौका मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के अभ्यास भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक भूमिका को भी दर्शाते हैं।

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