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हॉर्मुज संकट: पर्शियन गल्फ में 24 भारतीय जहाज, 23,000 भारतीय नाविकों पर सरकार की नजर

 

हॉर्मुज संकट: पर्शियन गल्फ में 24 भारतीय जहाज, 23,000 भारतीय नाविकों पर भारत सरकार की कड़ी निगरानी

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर उठती चिंताओं के बीच भारत सरकार ने पर्शियन गल्फ और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मीडिया को बताया कि इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल पर लगातार नजर रखी जा रही है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और पर्शियन गल्फ में मौजूद भारतीय जहाजों पर भारत सरकार की निगरानी, क्षेत्र में हजारों भारतीय नाविक कार्यरत।


सरकारी जानकारी के अनुसार वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पश्चिमी क्षेत्र में पर्शियन गल्फ में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके अतिरिक्त स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पूर्वी हिस्से में भी कुछ भारतीय जहाज सक्रिय हैं जिन पर भारतीय नाविक काम कर रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

विशेषज्ञों के अनुसार विश्व के लगभग एक तिहाई तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है।

इसी कारण जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री परिवहन पर पड़ता है।

23 हजार भारतीय नाविक खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत

भारत सरकार के अनुसार पूरे खाड़ी क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नाविक विभिन्न व्यापारी जहाजों, बंदरगाह संचालन और समुद्री परिवहन से जुड़े कार्यों में लगे हुए हैं।

ये नाविक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की रीढ़ माने जाते हैं और दुनिया भर में चलने वाले मालवाहक जहाजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सरकार की सतर्कता: हर जहाज की गतिविधियों पर नजर

जहाजरानी मंत्रालय ने बताया कि पर्शियन गल्फ और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद सभी भारतीय जहाजों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। इसके लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारतीय दूतावास, जहाज प्रबंधन कंपनियां और समुद्री एजेंसियां लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

नाविकों को जारी की गई सुरक्षा सलाह

भारत के समुद्री नियामक महानिदेशालय (DG Shipping) ने भी पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्हें लगातार निगरानी बनाए रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल नाविकों को अपने जहाज छोड़कर लौटने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें सुरक्षित तरीके से काम जारी रखने की सलाह दी गई है। 1

वैश्विक तनाव का असर समुद्री व्यापार पर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले और सुरक्षा घटनाएं सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ी है।

ऐसी परिस्थितियों में कई देशों ने अपने जहाजों की सुरक्षा बढ़ाने और समुद्री निगरानी मजबूत करने के कदम उठाए हैं। भारत भी अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए लगातार सक्रिय है।

भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा पहल

भारत ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए पहले भी कई पहलें की हैं। भारतीय नौसेना द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन संकल्प” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान रहा है, जिसका उद्देश्य भारतीय जहाजों और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इस अभियान के तहत भारतीय नौसेना ने अरब सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई और कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर नजर

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया से आने वाला कच्चा तेल भारत की ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि भारत सरकार इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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निष्कर्ष

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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