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Lyrid Meteor Shower 2026: आसमान में टूटते तारों की बारिश, देखने का सही समय जानिए

अप्रैल में आसमान में दिखेगी उल्काओं की बारिश: Lyrid Meteor Shower का शानदार नज़ारा, जानिए कब और कैसे देखें

अप्रैल 2026 में Lyrid Meteor Shower के दौरान आसमान में उल्काओं की बारिश और टूटते तारे


Trend2in News Desk | राकेश खुडिया
नई दिल्ली | 9 मार्च 2026


Skywatchers और खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए अप्रैल का महीना एक बेहद खास खगोलीय घटना लेकर आता है। इस दौरान रात के आसमान में उल्काओं की बारिश देखने को मिलती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Lyrid Meteor Shower कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे “टूटते तारे” भी कहते हैं। हर साल अप्रैल के मध्य में दिखाई देने वाली यह उल्का वर्षा पृथ्वी के अंतरिक्ष में धूमकेतु के छोड़े हुए कणों के रास्ते से गुजरने के कारण होती है। 2026 में भी इस अद्भुत खगोलीय घटना को दुनिया भर के लोग देख सकेंगे।


कब दिखाई देगी Lyrid Meteor Shower

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार Lyrid उल्का वर्षा हर साल लगभग 16 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच सक्रिय रहती है। इसका सबसे शानदार दृश्य आमतौर पर 22 और 23 अप्रैल की रात को देखने को मिलता है। इस दौरान साफ आसमान होने पर प्रति घंटे लगभग 10 से 18 उल्काएँ दिखाई दे सकती हैं। हालांकि कभी-कभी यह संख्या अचानक बढ़कर 80 से 100 उल्काएँ प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है।


क्या होती है उल्का वर्षा

उल्का वर्षा तब होती है जब पृथ्वी अंतरिक्ष में किसी धूमकेतु द्वारा छोड़े गए धूल और चट्टानों के छोटे-छोटे कणों के बादल से होकर गुजरती है। ये कण बेहद तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। जब ये कण वायुमंडल से टकराते हैं तो अत्यधिक गर्मी के कारण जलने लगते हैं और आसमान में चमकीली लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं। इन्हीं को हम आमतौर पर “टूटते तारे” या Shooting Stars कहते हैं।


Lyrid Meteor Shower का स्रोत

Lyrid Meteor Shower का संबंध Comet C/1861 G1 Thatcher नामक धूमकेतु से माना जाता है। यह धूमकेतु लगभग 415 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। जब पृथ्वी इस धूमकेतु के छोड़े हुए धूल कणों के रास्ते से गुजरती है, तब ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर चमकीली उल्काओं के रूप में दिखाई देते हैं।


हजारों साल पुरानी खगोलीय घटना

Lyrid उल्का वर्षा को मानव इतिहास की सबसे पुरानी दर्ज खगोलीय घटनाओं में से एक माना जाता है। इसका पहला ऐतिहासिक रिकॉर्ड 687 ईसा पूर्व चीन के खगोलविदों द्वारा दर्ज किया गया था। इतिहास में कई बार इस उल्का वर्षा ने असाधारण प्रदर्शन भी किया है। उदाहरण के लिए 1922 और 1982 में कई स्थानों पर प्रति घंटे लगभग 90 उल्काएँ देखी गई थीं।


भारत में कहाँ दिखाई देगी

Lyrid Meteor Shower दुनिया के दोनों गोलार्धों में दिखाई देती है, लेकिन उत्तरी गोलार्ध में इसका दृश्य अधिक स्पष्ट होता है। भारत उत्तरी गोलार्ध में स्थित होने के कारण यहां भी यह उल्का वर्षा आसानी से देखी जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों या शहरों की रोशनी से दूर स्थानों पर इसका दृश्य सबसे अच्छा दिखाई देता है।


उल्का वर्षा देखने का सही तरीका

  • शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान पर जाएं
  • रात के आसमान को ध्यान से देखें
  • मोबाइल या टॉर्च की रोशनी से बचें
  • आंखों को अंधेरे में अभ्यस्त होने के लिए 20-30 मिनट दें

विशेषज्ञों का कहना है कि इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी दूरबीन या टेलीस्कोप की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि उल्काएँ पूरे आसमान में दिखाई देती हैं।


क्यों चमकती हैं उल्काएँ

जब धूमकेतु के कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो उनकी गति लगभग 47 किलोमीटर प्रति सेकंड तक हो सकती है। इतनी तेज गति के कारण वायुमंडल से घर्षण पैदा होता है और ये कण जलने लगते हैं। जलते हुए ये कण आसमान में चमकीली लकीर छोड़ते हैं, जिसे हम उल्का या टूटता तारा कहते हैं।


2026 में अन्य प्रमुख उल्का वर्षाएँ

इनमें Perseids और Geminids को दुनिया की सबसे शानदार उल्का वर्षाओं में गिना जाता है।


निष्कर्ष

अप्रैल 2026 में होने वाली Lyrid Meteor Shower खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार अवसर है। साफ आसमान और अंधेरे स्थान पर खड़े होकर लोग इस प्राकृतिक प्रकाश प्रदर्शन का आनंद ले सकते हैं। यदि मौसम अनुकूल रहा तो रात के आसमान में कई चमकीली उल्काएँ दिखाई दे सकती हैं जो कुछ ही सेकंड के लिए आसमान में चमकती हुई लकीर छोड़ जाएँगी।


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