श्रद्धांजलि: वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ जयपुर
नारायण बारेठ: जनसरोकार की पत्रकारिता की बुलंद आवाज, जिसने खबरों को समाज की धड़कनों से जोड़ा
जयपुर: वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और राजस्थान के पूर्व सूचना आयुक्त नारायण बारेठ का निधन केवल एक व्यक्ति के जाने की खबर नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के उस दौर का अंत भी है जिसमें खबरें केवल सूचना नहीं बल्कि समाज की आवाज होती थीं। राजस्थान की पत्रकारिता में बीबीसी जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ एक ऐसा नाम थे, जिन्होंने दशकों तक अपनी निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता से एक अलग पहचान बनाई।
वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ कई दिनों से निमोनिया से पीड़ित थे और उपचार के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता जगत, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके श्रोताओं-पाठकों में गहरा शोक व्याप्त है।
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पत्रकारिता की शुरुआत: जमीन से जुड़ी रिपोर्टिंग
नारायण बारेठ की पत्रकारिता यात्रा राजस्थान की धरती से शुरू हुई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स से की और जल्दी ही अपनी गंभीर रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक दृष्टि के कारण पहचान बनाने लगे। शुरुआती दौर में ही उन्होंने समझ लिया था कि पत्रकारिता का वास्तविक अर्थ सत्ता के गलियारों की खबरें देना नहीं बल्कि समाज के उन वर्गों की आवाज बनना है जिनकी आवाज अक्सर दब जाती है।
उनकी रिपोर्टिंग का दायरा केवल शहरों तक सीमित नहीं था। वे गांवों, रेगिस्तानी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में जाकर वहां के लोगों की समस्याओं को समझते थे और उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाते थे।
बीबीसी से जुड़कर बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
पत्रकारिता में उनकी गंभीरता और गहराई ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों तक पहुंचाया। वे लंबे समय तक बीबीसी हिंदी सेवा से जुड़े रहे और जयपुर से संवाददाता के रूप में काम किया। बीबीसी के लिए उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
राजस्थान की राजनीति, सूखा, सीमावर्ती इलाके, प्रवासन, सामाजिक असमानता और विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी रिपोर्टिंग को विशेष महत्व दिया जाता था। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों जैसे महिलाओं के अधिकार, दलित समुदाय की समस्याएं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
रेडियो पत्रकारिता के दौर में उनकी आवाज लाखों श्रोताओं तक पहुंचती थी। जब वे समाचार समाप्त करते हुए कहते थे—
“ना-रा-या-न ---- बा-रे-ठ -------- ज। य। पू। र।”
तो यह केवल परिचय नहीं बल्कि एक पहचान बन गया था। उनकी आवाज में गूंजता आत्मविश्वास और शब्दों की स्पष्टता श्रोताओं के मन में गहरी छाप छोड़ती थी।
जनसरोकार की पत्रकारिता का मजबूत स्तंभ
नारायण बारेठ की पत्रकारिता का मूल आधार जनहित था। वे मानते थे कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य सत्ता और समाज के बीच संवाद स्थापित करना है। उनकी रिपोर्टिंग में हमेशा उन लोगों की समस्याएं सामने आती थीं जो अक्सर मुख्यधारा की खबरों में जगह नहीं बना पाते।
उन्होंने राजस्थान के सूखा प्रभावित क्षेत्रों, सीमावर्ती गांवों और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनके लेख और रिपोर्ट केवल घटनाओं का विवरण नहीं होते थे बल्कि उनमें समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती थी।
सूचना आयोग में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
पत्रकारिता के लंबे अनुभव और पारदर्शिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें राजस्थान का सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सूचना के अधिकार को मजबूत करने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
सूचना आयोग में रहते हुए उन्होंने हजारों मामलों का निपटारा किया और सरकारी संस्थाओं को यह निर्देश दिया कि वे नागरिकों को सूचना देने में पारदर्शिता बरतें।
शिक्षा और पत्रकारिता प्रशिक्षण से भी जुड़ाव
नारायण बारेठ केवल पत्रकार ही नहीं बल्कि एक शिक्षक भी थे। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय और हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को पढ़ाया। उनके व्याख्यानों में पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर दिया जाता था।
वे अक्सर कहा करते थे कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। यदि पत्रकारिता मजबूत होगी तो लोकतंत्र भी मजबूत रहेगा।
सादगी और संवेदनशीलता से भरा व्यक्तित्व
नारायण बारेठ का व्यक्तित्व बेहद सरल और विनम्र था। वे नए पत्रकारों को प्रोत्साहित करते थे और उन्हें पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के बारे में समझाते थे।
उनका कहना था कि पत्रकारिता में सबसे महत्वपूर्ण चीज भरोसा है। यदि पत्रकार जनता का भरोसा जीत लेता है तो वही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पत्रकारिता जगत में शोक की लहर
नारायण बारेठ के निधन की खबर सामने आने के बाद राजस्थान सहित देशभर के पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं ने शोक व्यक्त किया। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता को जनहित का माध्यम बनाया और हमेशा निष्पक्ष तथा जिम्मेदार पत्रकारिता की मिसाल पेश की।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई नेताओं ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने जनसरोकार की पत्रकारिता के माध्यम से समाज में एक विशिष्ट पहचान बनाई थी।
पत्रकारिता की अमिट विरासत
नारायण बारेठ का जीवन पत्रकारिता के विद्यार्थियों और युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने अपने पूरे करियर में यह दिखाया कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना है।
उनकी लेखनी, उनकी आवाज और उनका विश्लेषण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेगा। आज जब मीडिया तेजी से बदलते दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में नारायण बारेठ जैसे पत्रकारों की विरासत हमें यह याद दिलाती है कि पत्रकारिता का आधार हमेशा सत्य, निष्पक्षता और जनहित होना चाहिए।
नारायण बारेठ अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी पत्रकारिता, उनकी आवाज और उनके विचार हमेशा जीवित रहेंगे।

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राकेश खुडिया