लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव आखिरकार ध्वनिमत से खारिज हो गया। सदन की कार्यवाही के दौरान इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई और बाद में इसे आवाज मत से नकार दिया गया।
सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने कहा कि इस प्रस्ताव पर मतदान की आवश्यकता नहीं है और ध्वनिमत के आधार पर इसे खारिज किया जाता है।
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अमित शाह ने दिया जवाब
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में बोलते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संविधान में स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष और सम्मानित माना गया है और इस पद की गरिमा को बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है।
अमित शाह ने कहा कि स्पीकर की नियुक्ति में विभिन्न दलों की सहमति शामिल होती है और स्पीकर किसी एक दल के नहीं बल्कि पूरे सदन के होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद की गरिमा को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि ऐसे मामलों में सदन की परंपराओं का सम्मान किया जाए।
कैसे खारिज हुआ प्रस्ताव
लोकसभा में चर्चा के बाद अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने सदन से ध्वनिमत के जरिए फैसला लेने को कहा। इसके बाद सदन में आवाज मत से प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
ध्वनिमत से प्रस्ताव खारिज होने के बाद सदन में मौजूद सांसदों से कहा गया कि जो सदस्य प्रस्ताव के खिलाफ हैं वे अपनी बात रखें। बहुमत सदस्यों की आवाज प्रस्ताव के विरोध में होने के कारण इसे अस्वीकार घोषित कर दिया गया।
इससे पहले बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
राजनीतिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला संसद की कार्यवाही और संसदीय परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष ने जहां स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाए, वहीं सरकार ने इसे पूरी तरह निराधार बताया।
सरकार का कहना है कि स्पीकर का पद संविधान द्वारा निर्धारित एक निष्पक्ष संस्था है और इस पर सवाल उठाना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
वहीं विपक्ष का कहना था कि सदन में सभी पक्षों को समान अवसर मिलना चाहिए और इसी मुद्दे को लेकर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।
संसद की कार्यवाही में बढ़ा राजनीतिक तापमान
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान संसद में राजनीतिक माहौल काफी गर्म दिखाई दिया। कई सांसदों ने अपने-अपने पक्ष में जोरदार तर्क रखे।
संसदीय कार्यवाही के दौरान कई बार शोर-शराबा भी देखने को मिला, लेकिन अंत में सदन की प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में संसद की कार्यवाही और राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

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राकेश खुडिया