रायसिंहनगर में दो शादियों का सच: पत्नी को गर्भवती छोड़ फरार हुआ पति, कोर्ट के वारंट के बाद भी नहीं हुआ पेश
Trend2in रायसिंहनगर News Desk से रमेश लोटिया | 17 मार्च
रायसिंहनगर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक ढांचे पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवक पर आरोप है कि उसने अपनी पहली शादी की जानकारी छुपाकर दूसरी शादी की, दहेज लिया और फिर पत्नी को गर्भवती हालत में छोड़ दिया। इस पूरे मामले में अदालत द्वारा कई बार वारंट जारी किए जाने के बावजूद आरोपी पेश नहीं हुआ, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में लगातार देरी हो रही है।
🔍 मामला क्या है: एक शादी नहीं, दो-दो जिंदगी बर्बाद
यह मामला रायसिंहनगर के वार्ड नंबर 35 स्थित कुम्हार बस्ती का है, जहां की निवासी आरजू रानी की शादी 9 मई 2021 को नरेंद्र सिंह कुशवाहा के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के समय लड़की पक्ष को यह जानकारी नहीं दी गई कि नरेंद्र पहले से शादीशुदा है। आरोप है कि उसने यह तथ्य छुपाकर दूसरी शादी की, जो सीधे तौर पर हिंदू विवाह अधिनियम का उल्लंघन है।
शादी के शुरुआती कुछ महीनों में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जल्द ही स्थिति बदलने लगी। आरजू रानी के अनुसार, शादी के बाद दहेज की मांग शुरू हो गई और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वह गर्भवती हुई और कुछ समय बाद उसे मायके भेज दिया गया, जहां से उसे दोबारा ससुराल नहीं बुलाया गया।
⚖️ पहली पत्नी का मामला: पहले भी दर्ज हो चुका है केस
जांच में सामने आया कि नरेंद्र सिंह कुशवाहा की पहली शादी सपना नामक महिला से 10 जुलाई 2019 को हुई थी। सपना ने भी आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 498A, 323 और 406 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
यह मामला 2022 से अदालत में विचाराधीन है, लेकिन इस पूरे विवाद की जानकारी दूसरी पत्नी आरजू रानी और उसके परिवार से छुपाई गई। यही वजह है कि यह मामला अब और अधिक गंभीर बन गया है, क्योंकि इसमें धोखाधड़ी, दहेज प्रताड़ना और द्विविवाह जैसे आरोप शामिल हैं।
🚨 कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
आरजू रानी द्वारा 18 मार्च 2023 को दर्ज कराए गए दहेज प्रताड़ना के मामले में अदालत ने आरोपी के खिलाफ वारंट जारी किया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आरोपी अब तक अदालत में पेश नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार, कोर्ट द्वारा तीन से चार बार वारंट जारी किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार आरोपी अनुपस्थित रहा।
इस स्थिति को लेकर पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी और उसका परिवार जानबूझकर कोर्ट की अवहेलना कर रहा है और पुलिस प्रशासन को भी गुमराह कर रहा है। इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और पीड़ित परिवार को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
👩👦 पीड़िता की स्थिति: संघर्ष और जिम्मेदारी
आरजू रानी का कहना है कि उसका बेटा अब चार साल का हो चुका है और वह उसकी परवरिश अकेले कर रही है। वह अपने बच्चे की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए छोटे-मोटे काम करने को मजबूर है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, क्योंकि उसके पिता एक छोटी नर्सरी चलाते हैं, जिससे परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता है।
पीड़िता ने अदालत में अपने और अपने बच्चे के भरण-पोषण के लिए गुहार लगाई है, लेकिन आरोपी के पेश न होने के कारण मा
मला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
💔 सामाजिक प्रभाव: दो परिवारों पर असर
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं है, बल्कि दो परिवारों की जिंदगी पर असर डाल चुका है। पहली पत्नी पहले ही न्याय के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि दूसरी पत्नी भी अब उसी स्थिति का सामना कर रही है। इस तरह के मामलों से समाज में महिलाओं की सुरक्षा और विवाह व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
⚠️ कानून और व्यवस्था पर सवाल
लगातार वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी का पेश न होना कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन ऐसे मामलों में पर्याप्त कार्रवाई कर रहा है? क्या पीड़ितों को समय पर न्याय मिल पा रहा है? यह सवाल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं।
📊 विश्लेषण: बढ़ते दहेज और धोखाधड़ी के मामले
इस प्रकार के मामले आज के समाज में बढ़ते जा रहे हैं, जहां दहेज के लिए प्रताड़ना और शादी में धोखाधड़ी जैसे अपराध सामने आ रहे हैं। यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि सामाजिक मूल्यों के लिए भी खतरा है।
🎯 निष्कर्ष
रायसिंहनगर का यह मामला एक गंभीर सामाजिक और कानूनी चुनौती के रूप में सामने आया है। एक तरफ पीड़ित महिलाएं न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपी कानून से बचने की कोशिश कर रहा है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और त्वरित न्याय की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
अपनी राय यहां प्रकाशित करें। लॉगिन की आवश्यकता नहीं है।
राकेश खुडिया