नगर निकाय चुनाव में बड़ा संशोधन
राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा में पारित, दो से अधिक संतानों वाले भी लड़ सकेंगे निकाय चुनाव
जयपुर | 10 मार्च 2026
Rajasthan Municipal Amendment Bill 2026 passed in the Rajasthan Assembly has brought a major change in local body elections. Candidates having more than two children will now be eligible to contest municipal elections in the state. The decision has sparked political debate and public discussion across Rajasthan.
राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण विधायी फैसला लिया गया। राज्य सरकार द्वारा लाया गया राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस संशोधन के बाद अब दो से अधिक संतानों वाले व्यक्ति भी नगर निकाय चुनावों में उम्मीदवार बन सकेंगे।
क्या था पुराना नियम
राजस्थान में पहले यह प्रावधान लागू था कि जिन व्यक्तियों के दो से अधिक बच्चे हैं वे नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते थे। इस नियम को जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था। सरकार का मानना था कि इससे जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने का संदेश समाज में जाएगा।
हालांकि समय के साथ इस नियम को लेकर कई सवाल उठे। कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का तर्क था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव लड़ने के अधिकार पर ऐसी पाबंदी उचित नहीं है।
नागरिक विकास मंत्री ने दिया संशोधन का तर्क
नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विधानसभा में चर्चा के दौरान कहा कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह नियम अब अप्रासंगिक हो गया था।
उन्होंने बताया कि लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप यह जरूरी है कि अधिक से अधिक लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर मिले। सरकार का मानना है कि अनुभव और जनसमर्थन रखने वाले लोगों को केवल पारिवारिक स्थिति के आधार पर चुनाव से बाहर करना उचित नहीं है।
मंत्री ने कहा कि यह संशोधन लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगा और स्थानीय निकायों में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
खतरनाक रोगों की सूची में भी किया गया बदलाव
संशोधन विधेयक के तहत राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 में भी बदलाव किया गया है। सरकार ने अधिनियम में परिभाषित कुछ “खतरनाक रोगों” की सूची में संशोधन किया है।
इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति के साथ केवल रोग की स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो। कई मामलों में देखा गया था कि कुछ रोगों के कारण लोगों को सार्वजनिक जीवन में भागीदारी से रोका जा रहा था।
सरकार का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा और उपचार की उपलब्धता को देखते हुए ऐसे कई प्रावधान अब पुराने हो चुके हैं।
नगर निकाय चुनाव में देरी का कारण
विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री ने बताया कि राज्य में नगर निकाय चुनाव कराने में देरी का एक बड़ा कारण अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण से जुड़े मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोगों द्वारा राजनीतिक आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट दिशानिर्देश दिए हैं।
न्यायालय के आदेश के अनुसार किसी भी राज्य को स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण लागू करने से पहले संबंधित वर्ग की जनसंख्या के आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत करने होते हैं।
ओबीसी जनसंख्या के आंकड़े नहीं होने से चुनाव में देरी
सरकार के अनुसार वर्तमान में राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अधिकृत आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण निकाय चुनावों में देरी हो रही है।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि OBC समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन इसके लिए न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
जब तक सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है।
परिसीमन का कार्य लगभग पूरा
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि राज्य के अधिकांश नगर निकायों में परिसीमन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
राज्य के कुल 309 नगर निकायों में से 234 में परिसीमन कार्य नए मानकों के अनुसार किया जा चुका है। शेष निकायों में भी इस प्रक्रिया को अंतिम चरण में बताया गया है।
परिसीमन का उद्देश्य वार्डों की सीमाओं को इस प्रकार निर्धारित करना है कि प्रत्येक क्षेत्र में जनसंख्या का संतुलन बना रहे।
मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया
मंत्री ने बताया कि मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास होता है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चलाई जा रही है।
इस प्रक्रिया के अंतिम आंकड़े आने में चार से छह महीने तक का समय लग सकता है।
इसके बाद ही नई मतदाता सूची तैयार की जाएगी और चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकेगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा
विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विकास कार्यों को लेकर नया नियम
मंत्री ने कहा कि सांसद और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपी/एमएलए लैड) से किसी विकास कार्य के लिए राशि तभी स्वीकृत की जाएगी जब संबंधित भूमि का रिकॉर्ड राजस्व विभाग में उपलब्ध होगा।
इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी और सरकारी धन का उपयोग सही दिशा में सुनिश्चित किया जा सकेगा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
कुछ राजनीतिक दलों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, जबकि कुछ संगठनों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण नीति के खिलाफ बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन से स्थानीय निकायों में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है और चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक हो सकता है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था को मिलेगा विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह संशोधन लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा दे सकता है।
स्थानीय निकाय लोकतंत्र की जड़ माने जाते हैं और यहां से ही राजनीतिक नेतृत्व का विकास होता है।
इसलिए अधिक लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलने से स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो सकती है।
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राकेश खुडिया