RBI का बड़ा फैसला: डिजिटल फ्रॉड में ₹25,000 तक मुआवजा देने की तैयारी
डिजिटल फ्रॉड पर लगाम: ₹50,000 तक के साइबर ठगी मामलों में ग्राहकों को मिलेगा ₹25,000 मुआवजा
Trend2in News Desk | राकेश खुडिया | नई दिल्ली, 7 March 2026
RBI Digital Fraud Compensation Rule 2026: देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के साथ साइबर ठगी की घटनाएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। आम लोगों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ ₹50,000 से कम का डिजिटल फ्रॉड होता है और वह समय पर शिकायत दर्ज कर देता है, तो बैंक उसे अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा दे सकता है।
सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था उन मामलों में लागू होगी जहाँ ग्राहक फ्रॉड की जानकारी मिलने के बाद निर्धारित समय में बैंक को सूचित करता है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में लोगों का भरोसा बनाए रखना है।
क्या है RBI का नया प्रस्ताव
रिजर्व बैंक का मानना है कि डिजिटल बैंकिंग का विस्तार तभी संभव है जब ग्राहकों को सुरक्षा का भरोसा मिले। इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है कि यदि किसी ग्राहक के खाते से साइबर फ्रॉड के जरिए पैसा निकल जाता है और वह समय पर शिकायत करता है, तो बैंक को एक निश्चित सीमा तक मुआवजा देना होगा।
यदि ग्राहक के खाते से ₹50,000 तक की राशि साइबर फ्रॉड के कारण निकलती है, तो बैंक अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा दे सकता है। हालांकि हर मामले में जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
5 दिन में शिकायत जरूरी
प्रस्ताव के अनुसार यदि ग्राहक को किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलती है तो उसे तुरंत बैंक को सूचित करना होगा। यदि शिकायत 5 दिनों के भीतर दर्ज कर दी जाती है तो बैंक उस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखेगा।
यदि जांच में यह साबित होता है कि ग्राहक की ओर से कोई गंभीर लापरवाही नहीं थी, तो बैंक को मुआवजा देना पड़ सकता है।
डिजिटल भुगतान के बढ़ते खतरे
भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट के जरिए हर दिन करोड़ों लेन-देन होते हैं। लेकिन इसके साथ साइबर अपराधियों के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं।
फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल और OTP ठगी के जरिए लोगों के बैंक खातों से पैसा निकालने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। कई मामलों में पीड़ित को यह भी पता नहीं चलता कि उसके खाते से पैसा कब निकल गया।
RBI का मानना है कि यदि ग्राहकों को सुरक्षा और मुआवजा व्यवस्था का भरोसा दिया जाए, तो वे डिजिटल भुगतान प्रणाली का अधिक विश्वास के साथ उपयोग करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा को लेकर और भी सख्त नियम बनाए जा सकते हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
अपनी राय यहां प्रकाशित करें। लॉगिन की आवश्यकता नहीं है।
राकेश खुडिया