MD ड्रग्स का खतरनाक जाल: कॉलेज स्टूडेंट्स बने निशाना, जोधपुर में फैक्ट्री का बड़ा खुलासा
MD ड्रग्स का जाल: कॉलेज स्टूडेंट्स बने टारगेट, जोधपुर में फैक्ट्री का खुलासा, गुजरात से आता था केमिकल
Trend2in News Desk | जोधपुर
राजस्थान के जोधपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एमडी ड्रग्स की अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क सिर्फ ड्रग्स बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मुख्य टारगेट कॉलेज स्टूडेंट्स थे, जिन्हें इस खतरनाक नशे की सप्लाई की जा रही थी।
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घर की छत पर बन रही थी ‘मौत की फैक्ट्री’
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने ही घर की छत को ड्रग्स बनाने की लैब में बदल दिया था। यहां एमडी ड्रग्स तैयार की जाती थी और फिर उसे अलग-अलग जिलों और शहरों में सप्लाई किया जाता था। इस कार्रवाई में पुलिस ने करीब 3.055 किलो एमडी ड्रग्स और भारी मात्रा में केमिकल बरामद किए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। 0
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी आगे और बड़े स्तर पर उत्पादन की तैयारी में था और बरामद केमिकल से लगभग 60 किलो तक ड्रग्स तैयार की जा सकती थी। 1
कॉलेज स्टूडेंट्स थे मुख्य टारगेट
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य फोकस कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र थे। तस्कर जानबूझकर युवाओं को निशाना बना रहे थे ताकि उन्हें नशे की लत लगाई जा सके और लगातार डिमांड बनी रहे।
सूत्रों के मुताबिक, सरकारी और निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को खास तौर पर टारगेट किया जा रहा था। ड्रग्स सप्लाई का यह नेटवर्क धीरे-धीरे बड़े शहरों और पार्टियों तक फैल चुका था।
गुजरात से आता था केमिकल, बसों से होती थी सप्लाई
जांच में सामने आया कि एमडी ड्रग्स बनाने के लिए जरूरी केमिकल गुजरात से मंगवाए जाते थे। इन केमिकल्स को अलग-अलग पैकेट में भरकर स्लीपर बसों के जरिए राजस्थान लाया जाता था, ताकि पुलिस को शक न हो।
इसके बाद जोधपुर और आसपास के इलाकों में फैक्ट्री में ड्रग्स तैयार कर उसे विभिन्न जिलों और राज्यों तक पहुंचाया जाता था। इस नेटवर्क में राजस्थान के अलावा गुजरात, मुंबई और मध्य प्रदेश तक सप्लाई की कड़ी जुड़ी हुई थी।
कर्ज चुकाने के लिए शुरू किया खतरनाक धंधा
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी गणपत राम बेनीवाल ने महज 12 लाख रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए इस अवैध धंधे में कदम रखा था। उसने सांचौर के तस्करों से संपर्क किया और अपने घर को ही ड्रग्स फैक्ट्री में बदल दिया। 2
यह मामला यह भी दिखाता है कि कैसे छोटी आर्थिक परेशानियां भी लोगों को बड़े अपराध की ओर धकेल सकती हैं।
पूरे प्रदेश में फैला हुआ था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का दायरा सिर्फ जोधपुर तक सीमित नहीं था। जालोर, पाली, चित्तौड़गढ़ सहित कई जिलों में इसकी सप्लाई पहुंच रही थी। साथ ही गुजरात और मुंबई के तस्करों से भी इस गिरोह का सीधा संपर्क था।
राजस्थान में लगातार एमडी ड्रग्स फैक्ट्रियों के पकड़े जाने से यह साफ हो गया है कि राज्य अब केवल ट्रांजिट प्वाइंट नहीं रहा, बल्कि ड्रग्स प्रोडक्शन का बड़ा हब बनता जा रहा है। 3
पुलिस का सख्त संदेश: किसी को नहीं बख्शा जाएगा
एडीसीपी अमृतलाल जीनगर ने बताया कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि इस तरह के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।
अधिकारियों ने साफ किया कि ड्रग्स माफिया के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
युवा पीढ़ी को निशाना बनाने की साजिश
इस पूरे मामले ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि कैसे संगठित गिरोह युवाओं को टारगेट कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेज स्तर पर ड्रग्स की बढ़ती पहुंच आने वाले समय में समाज के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
पुलिस और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने और युवाओं को नशे से बचाने की है।

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राकेश खुडिया