रायसिंहनगर में खुलेगा संस्कृत विद्यालय: मांग के बाद सरकार की मंजूरी
रायसिंहनगर में खुलेगा संस्कृत विद्यालय, मांग के बाद सरकार ने जारी किया आदेश
Trend2in News Desk | श्रीगंगानगर
रायसिंहनगर नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 19 में संस्कृत विद्यालय खोलने को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग अब पूरी हो गई है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती मल्लिका उमेश सोनी द्वारा की गई पहल के बाद राजस्थान सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, श्रीमती मल्लिका उमेश सोनी (एडवोकेट) ने दिनांक 24 मार्च 2025 को पत्र क्रमांक 09 के माध्यम से रायसिंहनगर क्षेत्र में संस्कृत विद्यालय खोलने की मांग की थी। यह प्रस्ताव उपखंड अधिकारी, रायसिंहनगर के जरिए माननीय शिक्षा मंत्री तक पहुंचाया गया।
वार्ड नंबर 19 में खुलेगा विद्यालय
सरकारी आदेश के अनुसार, रायसिंहनगर के वार्ड नंबर 19 में, जहां वर्तमान में इंदिरा रसोई संचालित हो रही है, उसी परिसर में संस्कृत विद्यालय शुरू किया जाएगा। इससे स्थानीय विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
यह निर्णय क्षेत्र के छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से इस क्षेत्र में संस्कृत शिक्षा के लिए कोई समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
आदेश जारी, शिक्षा विभाग की कार्रवाई शुरू
संस्कृत शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि प्रदेश के कई विद्यालयों का पुनर्संरचना और स्थानांतरण किया जा रहा है, जिसके तहत रायसिंहनगर क्षेत्र को भी शामिल किया गया है।
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि नए सत्र से ही विद्यालय संचालन सुनिश्चित किया जाए और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जाए।
जनप्रतिनिधियों का जताया आभार
इस मांग के पूरा होने पर श्रीमती मल्लिका उमेश सोनी ने राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद श्री निहालचंद का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय क्षेत्र के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा और संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देगा।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत विद्यालय खोलने से न केवल भाषा का संरक्षण होगा, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ने में मदद मिलेगी।
यह निर्णय ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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राकेश खुडिया