रायसिंहनगर में विश्व शांति के लिए सर्व समाज का मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
रायसिंहनगर में विश्व शांति के लिए सर्व समाज का मार्च, राष्ट्रपति के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन
Trend2in News Desk | रायसिंहनगर | रिपोर्ट: रमेश लोटिया
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर में सोमवार को एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब सर्व समाज के लोगों ने एकजुट होकर विश्व शांति, मानवता की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ा शांति मार्च निकाला। यह मार्च केवल एक स्थानीय कार्यक्रम नहीं बल्कि वैश्विक मुद्दों पर चिंता जताने वाला एक सशक्त संदेश बनकर सामने आया।
परशुराम वाटिका से शुरू हुआ शांति मार्च
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह करीब 11 बजे परशुराम वाटिका (पब्लिक पार्क), श्री गुरुद्वारा सिंह सभा के सामने हुई, जहां शहर के विभिन्न वर्गों के लोग एकत्रित हुए। इसके बाद मुख्य बाजार मार्ग से रोष जुलूस निकालते हुए यह शांति मार्च उपखंड अधिकारी कार्यालय तक पहुंचा।
इस दौरान शहर के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर "विश्व शांति" और "मानवता बचाओ" जैसे संदेश दिए।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
शांति मार्च के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी (SDM) को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि भारत सरकार युद्धग्रस्त देशों के बीच मध्यस्थता कर शांति वार्ता शुरू करवाए।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान समय में विश्व के कई हिस्सों में युद्ध और सैन्य संघर्ष बढ़ते जा रहे हैं, जिससे मानवता और पर्यावरण दोनों को गंभीर नुकसान हो रहा है।
युद्ध से सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि युद्ध का सबसे अधिक दुष्प्रभाव आम नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। इसके साथ ही पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिरता भी गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
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कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि इतिहास गवाह है कि युद्ध कभी भी स्थायी समाधान नहीं देता, बल्कि केवल विनाश और पीड़ा को जन्म देता है। इसलिए विश्व समुदाय को संवाद और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
भारत से शांति की पहल की उम्मीद
भाजपा नेता ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि भारत हमेशा से शांति और सह-अस्तित्व का समर्थक रहा है। "वसुधैव कुटुम्बकम" की भावना भारत की संस्कृति का मूल है, जो पूरे विश्व को एक परिवार मानती है।
उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा के मार्ग से भी बड़े संघर्षों का समाधान संभव है।
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भारत निभा सकता है मध्यस्थ की भूमिका
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनीष कौशल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत जैसे लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय देश से पूरी दुनिया को उम्मीद है कि वह युद्धरत देशों के बीच मध्यस्थता कर शांति की दिशा में ठोस कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि भारत इस दिशा में पहल करता है, तो यह न केवल संबंधित देशों के बीच संवाद शुरू कर सकता है बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
सर्व समाज का संदेश – युद्ध नहीं, शांति चाहिए
शांति मार्च में शामिल नागरिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम जनता युद्ध नहीं बल्कि शांति चाहती है। यह कार्यक्रम किसी देश या पक्ष के समर्थन के लिए नहीं बल्कि मानवता और विश्व शांति के समर्थन में आयोजित किया गया था।
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कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में भूमि विकास बैंक चेयरमैन राकेश ठोलिया, पालिका अध्यक्ष मनीष कौशल, मनीराम पूनिया, हनुमान स्वामी, पार्षद श्याम छाबड़ा, राधेश्याम भाकर, अनिल कुमार, कुलभूषण अग्रवाल, दीपक धानुका, ओम प्रकाश गुप्ता सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और नरेगा महिला श्रमिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में विश्व शांति की आवश्यकता पर बल दिया और सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।
भूमि विकास बैंक चेयरमैन राकेश ठोलिया ने कहा कि विश्व शांति के लिए इस तरह के जनआंदोलन बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय से सामाजिक कार्यक्रमों और जनआंदोलनों से जुड़े रहने के कारण वे हमेशा ऐसे आयोजनों में भाग लेते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज विश्व के कई देशों में चल रहे युद्ध मानवता के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। ऐसे में भारत जैसे शांतिप्रिय राष्ट्र को आगे आकर मध्यस्थता करनी चाहिए और शांति वार्ता की पहल करनी चाहिए।
राकेश ठोलिया ने कहा कि "वसुधैव कुटुम्बकम" की भावना को अपनाते हुए हमें पूरे विश्व को एक परिवार मानकर शांति, सह-अस्तित्व और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।

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राकेश खुडिया