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सूरतगढ़ में अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई, नेताओं ने महिलाओं के सम्मान और शिक्षा पर दिया जोर

BREAKING सूरतगढ़ में अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई गई, नेताओं ने बाबा साहब के विचारों को बताया आज भी प्रासंगिक

सूरतगढ़ में अंबेडकर जयंती पर वाल्मीकि मंदिर में कार्यक्रम हुआ। नेताओं ने बाबा साहब के योगदान और महिलाओं के अधिकारों पर जोर दिया।
Trend2in News Desk से रमेश लोटिया | सूरतगढ़ मंडी | श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ क्षेत्र में संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। वाल्मीकि मंदिर प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया और बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सूरतगढ़ में अंबेडकर जयंती पर भव्य आयोजन, नेताओं ने दिए सामाजिक एकता और शिक्षा के संदेश

जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम 14 अप्रैल की शाम करीब 8 बजे अखिल भारतीय सफाई मजदूर कर्मचारी संघर्ष समिति और वाल्मीकि समाज सूरतगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को मिठाई वितरित कर खुशी जाहिर की गई और बाबा साहब के योगदान को याद किया गया।

मुख्य अतिथियों ने रखा अपना पक्ष

कार्यक्रम में भाजपा नेत्री पूजा छाबड़ा, राजस्थान वाल्मीकि महासभा के प्रदेशाध्यक्ष अमित कल्याणा, युवा नेता सतनाम वर्मा, एडवोकेट प्रमोद सहाय और बाबूसिंह खिंची मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

भाजपा नेत्री पूजा छाबड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि देश में आज महिलाओं को जो सम्मान और अधिकार मिल रहे हैं, वह बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की देन है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पहले महिलाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक थी, लेकिन संविधान में बनाए गए कानूनों के कारण आज महिलाएं देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच रही हैं।

शिक्षा और संगठन पर दिया जोर

राजस्थान वाल्मीकि महासभा के प्रदेशाध्यक्ष अमित कल्याणा ने बाबा साहब के मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इन सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारता है, वह समाज में अपनी अलग पहचान बनाता है।

उन्होंने शिक्षा को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि बिना शिक्षा के व्यक्ति का विकास अधूरा है। शिक्षा ही व्यक्ति को सही दिशा और सम्मान दिलाती है।

अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार

कार्यक्रम में बाबूसिंह खिंची, युवा नेता सतनाम वर्मा, सागर सिंह सिगलीगर, एडवोकेट प्रमोद सहाय, एकता अठवाल सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभी ने बाबा साहब के योगदान को याद करते हुए समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देने की बात कही।

अखिल भारतीय सफाई मजदूर कर्मचारी संघर्ष समिति की अध्यक्ष रेखा घुसर, उपाध्यक्ष किरण बाला, माया देवी वाल्मीकि सहित अन्य महिला प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

समाज के लोगों की रही बड़ी भागीदारी

इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में सुमन देवी सियोता, अमित कंडारा, शंकर सारवान, रमेश अठवाल, अनमोल भाटिया, महेंद्र भाटिया, संतोष कल्याणा, नेहा कल्याणा सहित दर्जनों महिला-पुरुष उपस्थित रहे।

सभी ने मिलकर बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

सामाजिक एकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता का विशेष संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और समाज को आगे बढ़ाने के लिए उनके सिद्धांतों को अपनाना जरूरी है।

सूरतगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि समाज को जोड़ने और जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी साबित हुआ।

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