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बीकानेर किडनी विवाद: परिजनों की जांच की मांग, अस्पताल बोला—किडनी निकालने का आरोप गलत

 

बीकानेर के जीवन रक्षा हॉस्पिटल पर किडनी निकालने के आरोप, परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की, अस्पताल ने आरोपों को बताया अफवाह

रमेश लोटिया
Trend2in News Desk | बीकानेर

बीकानेर में सामने आया एक मेडिकल विवाद इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जीवन रक्षा हॉस्पिटल पर लगे किडनी निकालने के आरोपों ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम जनता के बीच भी चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। इस पूरे मामले में पीड़ित परिजन न्याय की मांग को लेकर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक तक पहुंचे हैं और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज के साथ गंभीर लापरवाही हुई और उसकी किडनी निकाल ली गई। उनका कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और अस्पताल प्रबंधन ने मामले को छिपाने की कोशिश की। जैसे ही यह मामला सामने आया, शहर में चर्चा का माहौल बन गया और लोगों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अविश्वास बढ़ने लगा।

परिवार ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर इस मामले में न्याय नहीं मिला तो आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य सेवाओं से उठ सकता है।

हालांकि इस पूरे मामले में जीवन रक्षा हॉस्पिटल का पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है, जिसे विस्तार से समझना जरूरी है। अस्पताल प्रबंधन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।

अस्पताल के अनुसार, जिस प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह एक सामान्य नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) सर्जरी थी। इस प्रकार की सर्जरी में किडनी जैसे अंग को निकालने का कोई सवाल ही नहीं उठता। यह प्रक्रिया केवल सतही स्तर पर की जाती है और इसमें शरीर के अंदर गहराई तक हस्तक्षेप नहीं होता।

अस्पताल ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित सर्जरी केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है और मरीज को उसी दिन छुट्टी दे दी जाती है। यदि किसी मरीज की किडनी निकाली जाती, तो उसे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता और उसकी रिकवरी भी काफी समय लेती।

जीवन रक्षा हॉस्पिटल का यह भी कहना है कि कई बार मरीज जन्म से ही एक किडनी के साथ होता है, जिसे मेडिकल भाषा में “कंजेनिटल कंडीशन” कहा जाता है। ऐसे मामलों में मरीज या उसके परिवार को पहले से इसकी जानकारी नहीं होती और बाद में जब जांच होती है तो भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

अस्पताल प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सभी प्रक्रियाएं मेडिकल गाइडलाइन और नियमों के अनुसार ही की हैं। उनके अनुसार अस्पताल में सभी ऑपरेशन निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किए जाते हैं और मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।

अस्पताल ने यह भी कहा कि इस तरह के आरोप उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।

इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज और उनके परिजनों को हर मेडिकल प्रक्रिया की पूरी जानकारी देना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो झूठी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मामले के बाद बीकानेर में लोगों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। कई लोग अब अस्पतालों में इलाज करवाने से पहले अधिक जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रशासन की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद अहम हो गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सच्चाई क्या है और इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी स्पष्ट हो सकता है और सच्चाई सामने आ सकती है।

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