रायसिंहनगर पालिका में 11 लाख का घोटाला उजागर
रायसिंहनगर नगरपालिका में नगरीय विकास कर की राशि में 11 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। आंतरिक जांच में कार्बन कॉपी से छेड़छाड़ कर गबन सामने आया, 2 एलडीसी के खिलाफ केस दर्ज।
Trend2in News Desk | रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर) | रमेश लोटिया
रायसिंहनगर नगरपालिका में नगरीय विकास कर की राशि में करीब 11 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि रसीद बुक की कार्बन कॉपी से छेड़छाड़ कर लाखों रुपये का गबन किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिशासी अधिकारी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो कार्मिकों के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया है।
आंतरिक जांच में खुला घोटाले का राज
पालिका स्तर पर गठित आंतरिक जांच समिति ने जब नगरीय विकास कर की वसूली और रिकॉर्ड का मिलान किया, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि रसीद बुक में दर्ज रकम और वास्तविक जमा राशि में भारी अंतर था। इसी विसंगति ने पूरे मामले को उजागर कर दिया।
कार्बन कॉपी से छेड़छाड़ कर किया गया गबन
जांच रिपोर्ट के अनुसार एलडीसी अश्वनी कुमार ने रसीद बुक की कार्बन कॉपी में हेरफेर करते हुए करीब 10 लाख 86 हजार रुपये का गबन किया। वहीं दूसरे कार्मिक एलडीसी दीपक कुमार ने न्यायालय से संबंधित दस्तावेजों के जरिए 23 हजार 529 रुपये की राशि का गबन किया। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 11 लाख रुपये की हेराफेरी सामने आई है।
ईओ अभिषेक गहलोत ने दर्ज करवाया मामला
पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिषेक गहलोत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों कार्मिकों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया। इसके बाद रायसिंहनगर पुलिस ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। दोनों आरोपी कार्मिक पहले से ही निलंबित बताए जा रहे हैं।
पहले भी लगे थे गबन के आरोप
जानकारी के अनुसार इन दोनों कार्मिकों पर पहले भी पालिका के राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप लग चुके हैं। हालांकि उस समय मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और जांच ठंडे बस्ते में चली गई। यही कारण है कि अब इस नए खुलासे ने कई पुराने सवालों को फिर से जिंदा कर दिया है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले लगे आरोपों की जांच समय पर क्यों नहीं हुई? आखिरकार यह मामला अचानक अधिशासी अधिकारी के संज्ञान में कैसे आया? क्या पहले की लापरवाही ने इस घोटाले को बढ़ावा दिया? शहर के लोगों में भी इस मामले को लेकर आक्रोश है और वे सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की साख पर असर
नगरपालिका जैसे संस्थान में इस तरह का घोटाला सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। नगरीय विकास कर जैसी महत्वपूर्ण राशि में हेराफेरी ने यह संकेत दिया है कि वित्तीय निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी खामी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।


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राकेश खुडिया