BJP विधायक जयदीप बिहानी को पीटा, RUIDP अफसर गिरफ्तार
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीतिक माहौल और आम जनता की परेशानियों को एक साथ उजागर कर दिया है। जनसुनवाई के दौरान भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी और RUIDP (राजस्थान अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट) के अधिकारियों के बीच हुआ विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचाई है, बल्कि राज्य स्तर पर भी इस पर चर्चा तेज हो गई है।
घटना गुरुवार सुबह उस समय हुई जब विधायक सेवा केंद्र पर शहर की सबसे बड़ी समस्या—पानी की कमी—को लेकर जनसुनवाई आयोजित की गई थी। इस जनसुनवाई में RUIDP और L&T कंपनी के अधिकारियों को बुलाया गया था ताकि शहर में बाधित पेयजल आपूर्ति पर चर्चा कर समाधान निकाला जा सके। लेकिन तय समय पर अधिकारियों के नहीं पहुंचने से माहौल पहले से ही तनावपूर्ण हो गया था।
जानकारी के अनुसार विधायक जयदीप बिहाणी ने अधिकारियों को फोन कर तुरंत उपस्थित होने के लिए कहा। इसके बावजूद जब वे समय पर नहीं पहुंचे तो विधायक खुद मौके पर जाने लगे। इसी बीच कुछ देर बाद अधिकारी पहुंचे और यहीं से विवाद ने गंभीर रूप ले लिया।
विधायक का आरोप है कि जब उन्होंने अधिकारियों से जनता की समस्याओं को लेकर जवाब मांगा तो उन्होंने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया और उल्टा आक्रामक व्यवहार किया। विधायक के अनुसार RUIDP के सहायक अभियंता (AEN) जगनलाल बैरवा सहित अन्य अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की, जिसमें उनके चेहरे और आंख के पास चोट आई और उनका चश्मा टूट गया।
विधायक ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल उनके साथ नहीं, बल्कि जनता के प्रतिनिधि के सम्मान पर हमला है। उन्होंने इस मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंचाने की बात कही है।
दूसरी ओर प्रत्यक्षदर्शियों और कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि विवाद की शुरुआत तीखी बहस और कथित गाली-गलौज से हुई। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले शब्दों की लड़ाई हुई और फिर स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि अधिकारियों के साथ भी मारपीट हुई और एक अधिकारी की शर्ट तक फट गई।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कर्मचारियों और उपस्थित लोगों के बीच भी तनाव देखने को मिला। कुछ आरोप यह भी लगे कि इस दौरान कर्मचारियों के मोबाइल फोन तक जब्त कर लिए गए ताकि घटना के वीडियो या फोटो बाहर न जा सकें।
घटना की सूचना मिलते ही जवाहर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने RUIDP के AEN जगनलाल बैरवा, प्रोजेक्ट मैनेजर शाहनवाज और L&T कंपनी के एक प्लानिंग मैनेजर को हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना की असली जिम्मेदारी किसकी है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे शहर का गंभीर पेयजल संकट मुख्य कारण माना जा रहा है। श्रीगंगानगर के कई क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से पानी की सप्लाई बाधित है। खासकर पुरानी आबादी और करणपुर रोड क्षेत्र में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए भी पानी नहीं मिल रहा। कई परिवारों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है और कई जगहों पर पानी को लेकर झगड़े भी हो रहे हैं।
विधायक जयदीप बिहाणी ने आरोप लगाया कि RUIDP और L&T कंपनी की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी है। उनका कहना है कि शहर में लाइनमैन और वाल्वमैन की कमी है और विभागों के बीच तालमेल नहीं है, जिससे सप्लाई प्रभावित हो रही है।
वहीं दूसरी ओर PHED विभाग का कहना है कि उनके पास पर्याप्त पानी का स्टोरेज है और जरूरत पड़ने पर वे सप्लाई कर सकते हैं। इस तरह विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर टकराव भी सामने आ रहा है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की करीब 550 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जल योजना की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही का शिकार हो गई है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार में इस योजना के नाम पर बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी और अब तक उसे सुधारा नहीं गया है। उनके अनुसार अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की धांधली का शक है और सरकार को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब अधिकारी विधायक सेवा केंद्र पहुंचे तो माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
कुछ लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के साथ हाथापाई की। इस दौरान एक अधिकारी की शर्ट फट गई और बाद में उसे नई शर्ट लाकर पहनाई गई। यह घटना इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी आपस में ही टकराने लगें तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा, यह एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
जनता का कहना है कि उन्हें न तो समय पर पानी मिल रहा है और न ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। प्रशासन और विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिससे स्थिति और खराब हो रही है।
यह घटना केवल एक विवाद नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है जिसमें बुनियादी सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। पानी जैसी आवश्यक सुविधा के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसे विवाद और बढ़ सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करे और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मामला महत्वपूर्ण है। यदि विधायक के आरोप सही साबित होते हैं तो अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि अधिकारियों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला राजनीतिक रूप ले सकता है।
इस घटना का असर आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यह मामला इस बात का भी संकेत है कि जनता अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है और समस्याओं को लेकर आवाज उठा रही है।
श्रीगंगानगर की यह घटना पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि यदि बुनियादी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
अंत में यह कहा जा सकता है कि यह मामला केवल मारपीट का नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम फेलियर का उदाहरण है। जब योजनाएं अधूरी रह जाती हैं, जब जिम्मेदारी तय नहीं होती और जब जनता को राहत नहीं मिलती, तब ऐसे विवाद सामने आते हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या इस घटना के बाद प्रशासन सच में कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।

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राकेश खुडिया