श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के लिए 1 लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं खरीद लक्ष्य स्वीकृत
राजस्थान सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के दौरान किसानों को बड़ी राहत देते हुए श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर एक लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं खरीद लक्ष्य स्वीकृत कर दिया है। इस फैसले को सीमावर्ती कृषि क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कई दिनों से किसान संगठन और व्यापारिक संस्थाएं खरीद लक्ष्य बढ़ाने की मांग कर रही थीं।
सरकार के इस निर्णय के बाद दोनों जिलों में हजारों किसानों को अपनी उपज बेचने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। साथ ही मंडियों में गेहूं खरीद प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद भी जताई जा रही है। कृषि प्रधान माने जाने वाले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले राजस्थान की खाद्य सुरक्षा और गेहूं उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अतिरिक्त खरीद लक्ष्य स्वीकृत होने को किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
किसानों और व्यापारिक संगठनों की मांग के बाद लिया गया निर्णय
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से किसान संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि गेहूं उत्पादन अधिक होने के कारण मौजूदा खरीद लक्ष्य पर्याप्त नहीं है। किसानों का कहना था कि यदि खरीद लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया तो बड़ी मात्रा में गेहूं खुले बाजार में कम दाम पर बेचना पड़ सकता है।
इसी मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए एक लाख मैट्रिक टन अतिरिक्त खरीद लक्ष्य को मंजूरी दी। माना जा रहा है कि इस निर्णय से मंडियों में खरीद का दबाव कम होगा और किसानों को उचित समर्थन मूल्य प्राप्त करने में आसानी होगी।
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में इस बार गेहूं उत्पादन अच्छा रहा है। मौसम की स्थिति अनुकूल रहने और सिंचाई सुविधाओं के कारण कई क्षेत्रों में बंपर पैदावार हुई। यही कारण रहा कि खरीद लक्ष्य बढ़ाने की मांग लगातार तेज होती जा रही थी।
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जिले में 56 खरीद केन्द्रों पर चल रही खरीद प्रक्रिया
जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव के अनुसार श्रीगंगानगर जिले में वर्तमान में 56 खरीद केन्द्रों पर पांच अलग-अलग खरीद एजेंसियों के माध्यम से गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। प्रशासन की ओर से खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी भी की जा रही है।
जिले के लिए पहले कुल 4 लाख 91 हजार 712 मैट्रिक टन गेहूं खरीद लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब अतिरिक्त लक्ष्य स्वीकृत होने के बाद खरीद प्रक्रिया को और गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन के अनुसार अब तक जिले में 27 हजार 543 किसानों से 2 लाख 83 हजार 861.17 मैट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। यह कुल लक्ष्य का लगभग 58 प्रतिशत माना जा रहा है।
कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में मंडियों में आवक और बढ़ सकती है। इसलिए अतिरिक्त खरीद लक्ष्य का फैसला समय पर लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
मुख्य मंडियों में तेजी से चल रही खरीद
श्रीगंगानगर जिले की प्रमुख मंडियों में गेहूं खरीद का कार्य तेजी से जारी है। गंगानगर मंडी में अब तक 31 हजार 278.65 मैट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।
इसी प्रकार विजयनगर मंडी में 32 हजार 619.35 मैट्रिक टन गेहूं की खरीद दर्ज की गई है। वहीं अनूपगढ़ मंडी में 21 हजार 383.55 मैट्रिक टन तथा सूरतगढ़ मंडी में 21 हजार 901.35 मैट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।
मंडी व्यापारियों का कहना है कि इस बार गेहूं की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण खरीद प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज गति से चल रही है। हालांकि कुछ स्थानों पर भीड़ और ट्रॉलियों की लंबी कतारों जैसी स्थिति भी देखने को मिली।
कई किसानों का कहना है कि अतिरिक्त खरीद लक्ष्य बढ़ने से अब मंडियों में राहत मिलने की उम्मीद है। पहले कई किसानों को यह चिंता थी कि यदि लक्ष्य पूरा हो गया तो उन्हें गेहूं कम दाम पर बेचना पड़ सकता है।
एफसीआई गोदामों में किया जा रहा भंडारण
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक खरीदे गए गेहूं में से 2 लाख 23 हजार 628 मैट्रिक टन गेहूं का उठाव कर एफसीआई के निर्धारित गोदामों में भंडारण किया जा चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि खरीद के साथ-साथ उठाव और भंडारण की प्रक्रिया भी लगातार जारी रखी जा रही है ताकि मंडियों में अनावश्यक दबाव न बने।
जानकारों के अनुसार यदि समय पर उठाव नहीं हो तो मंडियों में ट्रॉलियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है और किसानों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में इस बार प्रशासन उठाव व्यवस्था पर विशेष ध्यान दे रहा है।
Trend2in Ground Analysis
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ राजस्थान के सबसे बड़े कृषि जिलों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में नहर आधारित सिंचाई व्यवस्था होने के कारण गेहूं उत्पादन बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में खरीद लक्ष्य बढ़ाना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह रही है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद यदि सरकारी खरीद सीमित रहती है तो बाजार में दाम गिर जाते हैं। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है।
इस बार सरकार द्वारा अतिरिक्त लक्ष्य स्वीकृत करने से यह संदेश गया है कि किसान संगठनों की मांगों को गंभीरता से सुना गया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की बजाय जानकारों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान, तेज उठाव और पारदर्शी खरीद व्यवस्था बनी रहती है तो यह निर्णय किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।
MSP और बोनस ने किसानों को दी बड़ी राहत
राज्य सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसके अलावा राजस्थान कृषक समर्थन योजना के तहत किसानों को 150 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है।
इस प्रकार किसानों को कुल 2735 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान मिल रहा है। किसानों का कहना है कि बोनस राशि ने उन्हें अतिरिक्त राहत दी है, क्योंकि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
डीजल, खाद, बीज और मजदूरी की लागत बढ़ने के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में MSP के साथ बोनस को किसान सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
हालांकि कुछ किसान संगठनों का कहना है कि भविष्य में समर्थन मूल्य और बढ़ाने की जरूरत होगी ताकि खेती लाभकारी बनी रहे।
खरीद केन्द्रों पर सुविधाओं के दावे
प्रशासन का कहना है कि खरीद केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। खरीद केन्द्रों पर छाया, पेयजल, मॉइश्चर मीटर, तिरपाल और क्लीनर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
हालांकि कुछ किसानों ने भीड़भाड़ वाले केन्द्रों पर अतिरिक्त व्यवस्थाओं की मांग भी उठाई है। किसानों का कहना है कि आवक बढ़ने के साथ कई स्थानों पर लंबा इंतजार करना पड़ता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अतिरिक्त खरीद लक्ष्य का फायदा केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे ग्रामीण बाजारों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
जब किसानों को समय पर अच्छा भुगतान मिलता है तो उसका असर ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, खाद-बीज बाजार और ग्रामीण व्यापार पर भी दिखाई देता है।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे कृषि जिलों में गेहूं खरीद सीजन पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। यही कारण है कि अतिरिक्त खरीद लक्ष्य को बड़ा आर्थिक निर्णय भी माना जा रहा है।
अब किसानों की नजर भुगतान और उठाव पर
हालांकि अतिरिक्त लक्ष्य स्वीकृत होने के बाद किसानों की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन अब उनकी नजर समय पर भुगतान और तेज उठाव व्यवस्था पर भी टिकी हुई है।
कई किसानों का कहना है कि यदि खरीद तो हो जाए लेकिन भुगतान में देरी हो, तो आर्थिक संकट बना रहता है। इसलिए प्रशासन को भुगतान प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
फिलहाल सरकार के इस फैसले के बाद सीमावर्ती कृषि क्षेत्र में राहत और संतोष का माहौल दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में मंडियों में खरीद की रफ्तार और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Trend2in किसानों और मंडियों से जुड़ी हर बड़ी अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

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राकेश खुडिया