राजस्थान रोडवेज में फर्जी टिकट घोटाले का पर्दाफाश
राजस्थान रोडवेज में फर्जी टिकट घोटाले ने पूरे सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जयपुर-बीकानेर रूट पर चल रही एक बस में औचक जांच के दौरान सामने आया कि यात्रियों को आधिकारिक ETM मशीन की बजाय गुप्त डिवाइस से फर्जी टिकट जारी किए जा रहे थे। इस रोडवेज स्कैम ने न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि यह फर्जी टिकट घोटाला लंबे समय से और बड़े नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा हो सकता है।
ऐसे हुआ राजस्थान रोडवेज फर्जी टिकट स्कैम का खुलासा
राजस्थान रोडवेज के इस बड़े स्कैम का पर्दाफाश तब हुआ जब विभाग की टीम ने औचक जांच अभियान चलाया। जयपुर से बीकानेर जा रही बस को नोखा क्षेत्र के पास रोका गया और यात्रियों के टिकटों की जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि करीब 10 यात्रियों के पास मौजूद टिकट आधिकारिक सिस्टम से जारी नहीं थे। टिकट देखने में सामान्य थे, लेकिन उनकी सीरीज और नंबरिंग रोडवेज रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी।
ETM मशीन छोड़ ‘गुप्त डिवाइस’ से टिकट जारी
इस फर्जी टिकट घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि बस में मौजूद सारथी ने आधिकारिक ETM मशीन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था। जांच में पता चला कि एक बाहरी डिवाइस का उपयोग कर फर्जी टिकट प्रिंट किए जा रहे थे।
संभावना जताई जा रही है कि यह कोई थर्मल प्रिंटर या क्लोन सिस्टम हो सकता है, जिसे रोडवेज टिकट के फॉर्मेट की नकल करने के लिए तैयार किया गया था।
आरोपी फरार, साथ ले गया मशीन और नकदी
जैसे ही अधिकारियों ने फर्जी टिकट स्कैम की पुष्टि की, आरोपी मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि वह अपने साथ नकदी और डिवाइस भी लेकर भाग गया।
तलाशी के दौरान बस में छिपाकर रखे गए कई संदिग्ध टिकट भी बरामद हुए हैं, जिससे यह साफ हो गया कि यह घोटाला सुनियोजित तरीके से चल रहा था।
किन रूट्स पर चल रहा था रोडवेज स्कैम?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह फर्जी टिकट घोटाला मुख्य रूप से लंबी दूरी के रूट्स पर चल रहा था, जहां किराया अधिक होता है:
- अजमेर – बीकानेर
- नागौर – बीकानेर
- मेड़ता – बीकानेर
इन रूट्स पर यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण इस स्कैम को अंजाम देना आसान हो जाता है।
सरकार को कितना नुकसान?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फर्जी टिकट स्कैम लंबे समय से चल रहा था, तो राजस्थान रोडवेज को लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है।
हर फर्जी टिकट सीधे तौर पर सरकारी राजस्व की चोरी है।
नेटवर्क की तलाश, बड़ा गिरोह होने की आशंका
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाहरी डिवाइस कहां से आया। विभाग को आशंका है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह हो सकता है।
तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
रोडवेज सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने राजस्थान रोडवेज के टिकटिंग सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। इसमें दोराय नहीं की यह स्कैम पूरे राजस्थान में चल रहा था जिससे रोडवेज को अरबों रूपयों की चपत लगाई जा रही थी।सवाल यह है कि बिना निगरानी के यह स्कैम कैसे चलता रहा। यह राजस्थान रोडवेज के अधिकारियों की मिलीभगत का मामला सामने आता है।
यात्रियों के लिए चेतावनी
यात्रियों को अब सतर्क रहने की जरूरत है। टिकट लेते समय यह सुनिश्चित करें कि टिकट आधिकारिक ETM मशीन से ही जारी हुआ है।
राजस्थान रोडवेज में सामने आया यह फर्जी टिकट स्कैम केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते इस नेटवर्क को नहीं तोड़ा गया, तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है।
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राकेश खुडिया