🔴 धमाका समाचार
Loading latest news...

राजू मांझू गैंगस्टर की गिरफ्तारी की पूरी कहानी, 007 गैंग, पुलिस का अंडरकवर ऑपरेशन, साथी के धोखे से कैसे फंसा।

राजू मांझू गैंगस्टर की पूरी कहानी, 007 गैंग सरगना की गिरफ्तारी और डॉन बनने का अधूरा सपना


Trend2in News Desk | जयपुर/जालोर | 17 अप्रैल 2026

पश्चिमी राजस्थान का ‘डॉन’ बनने निकला राजू मांझू… 3 दिन तक पार्क में बिछे जाल में फंसा ‘बिल्ला’, साथी के धोखे से खुला पूरा खेल

जयपुर के मानसरोवर इलाके का एक साधारण सा पार्क… सुबह-शाम लोगों की चहल-पहल, बच्चे खेलते हुए और चाय की थड़ी पर बैठकर गपशप करते लोग। लेकिन इसी पार्क में तीन दिन तक एक ऐसा ऑपरेशन चल रहा था, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।

यह ऑपरेशन था एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का, जिसका निशाना था पश्चिमी राजस्थान में ‘डॉन’ बनने का सपना देखने वाला कुख्यात गैंगस्टर राजाराम उर्फ राजू मांझू

हथियार सप्लायर बनकर बिछाया गया जाल

पुलिस को इनपुट मिला था कि राजू मांझू जयपुर में किसी बड़ी वारदात की तैयारी में है और हथियारों की तलाश कर रहा है। इसके बाद ANTF ने सीधे गिरफ्तारी के बजाय रणनीति से काम लिया।

टीम ने खुद को हथियार सप्लायर बताकर राजू से संपर्क किया। कई दिनों तक बातचीत चली, भरोसा बनाया गया और आखिरकार मुलाकात के लिए जगह तय हुई—मानसरोवर का एक पार्क।

यहां से शुरू हुआ ऑपरेशन का असली खेल… पुलिस टीम तीन दिन तक पार्क के आसपास डेरा डालकर बैठी रही। किसी ने आम नागरिक बनकर निगरानी की, तो एक जवान चाय बेचने लगा ताकि किसी को शक न हो।

लाल टोपी, काला चश्मा… और गिरफ्तारी

राजू मांझू बेहद सतर्क था। वह सीधे मिलने से बच रहा था और ऑनलाइन डील की बात करता था। लेकिन आखिरकार वह मिलने को तैयार हुआ।

उसने मैसेज भेजा कि वह अकेले आएगा—लाल टोपी और काला चश्मा पहनकर।

जैसे ही वह पार्क में पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठी पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। उसे संभलने का मौका भी नहीं मिला और कुछ ही सेकंड में ‘डॉन’ बनने का सपना देखने वाला गैंगस्टर पुलिस की गिरफ्त में था।

पूछताछ में उसने बताया कि उसने हाल ही में एक वेब सीरीज देखी थी और उसी से उसे ‘एजेंट बनकर आने’ का आइडिया मिला था।

36 से ज्यादा केस, 75 हजार का इनामी बदमाश

फिलोदी के जम्भेश्वर नगर निवासी राजू मांझू पर हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, लूट, अवैध वसूली, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों की तस्करी सहित 36 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

जोधपुर ग्रामीण, फिलोदी और श्रीगंगानगर पुलिस ने उस पर 75 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।

क्रिकेट के मैदान से अपराध की दुनिया तक

राजू मांझू का अपराध की दुनिया में प्रवेश किसी बड़ी साजिश से नहीं, बल्कि एक छोटी सी कहासुनी से हुआ था। क्रिकेट खेलते समय हुई मारपीट ने उसे पहली बार अपराध की ओर धकेला।

2013 में उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे यह रास्ता उसकी पहचान बन गया।

‘007 गैंग’ का गठन और गैंगवार का दौर

2017-18 में उसने अपने गुरु श्याम पुनिया के साथ मिलकर ‘007 गैंग’ बनाई। गुरु के जेल जाने के बाद उसने खुद कमान संभाल ली और गैंग का सरगना बन बैठा।

इसके बाद इलाके में गैंगवार का दौर शुरू हो गया। 0029 गैंग, सरपंच गैंग और उजाराम गैंग जैसे प्रतिद्वंद्वियों से उसकी सीधी भिड़ंत होने लगी।

सड़कों पर गाड़ियां रोककर फायरिंग करना, टक्कर मारना और खुलेआम हमला करना उसका स्टाइल बन गया था।

वसूली, हथियार और सोशल मीडिया का खेल

राजू मांझू ने 2015 के आसपास भारतमाला प्रोजेक्ट और टोल प्लाजा से जुड़े अधिकारियों को धमकाकर अवैध वसूली शुरू की। इस संबंध में उसके खिलाफ करीब 14 मामले दर्ज हैं।

वह हथियारों का शौकीन था और सोशल मीडिया पर खुलेआम हथियारों के साथ फोटो डालकर उनका प्रचार करता था।

उसने सोशल मीडिया के जरिए करीब 2 लाख फॉलोअर्स का नेटवर्क बना लिया था, जिसके जरिए वह युवाओं को गैंग में जोड़ता था।

मादक पदार्थ तस्करी तक फैलाया नेटवर्क

अपराध की दुनिया में आगे बढ़ते हुए उसने जालोर से लेकर श्रीगंगानगर तक मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क खड़ा कर लिया था।

उसका नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा था और वह खुद को पश्चिमी राजस्थान का अगला ‘डॉन’ मानने लगा था।

सफेदपोश बनने की कोशिश: गोशाला का सहारा

जब अपराध की दुनिया में उसका नाम बन गया, तो उसने अपनी छवि बदलने की कोशिश की। उसने खुद को समाजसेवक के रूप में पेश करना शुरू किया।

‘रामदेव गोशाला’ के नाम से गोशाला खोलकर उसने धार्मिक आयोजनों के जरिए चंदा वसूली शुरू कर दी।

यह उसकी ‘सफेदपोश’ छवि बनाने की रणनीति का हिस्सा था।

साथी का धोखा बना गिरफ्तारी की वजह

राजू मांझू किसी बड़ी वारदात की तैयारी में था और हथियारों की तलाश में जयपुर पहुंचा था।

लेकिन इस बार उसका खेल पलट गया। उसके ही एक पुराने नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति ने पुलिस को गुप्त सूचना दे दी।

इसी सूचना के आधार पर ANTF ने पूरा ऑपरेशन प्लान किया और उसी चैनल के जरिए उससे संपर्क साधा।

जिस नेटवर्क पर उसे सबसे ज्यादा भरोसा था, उसी ने उसे पुलिस के जाल में फंसा दिया।

अंत: अधूरा रह गया ‘डॉन’ बनने का सपना

राजू मांझू अपराध की दुनिया में ‘बिल्ला’ की तरह दबे पांव चलता था, लेकिन इस बार पुलिस उससे एक कदम आगे निकली।

तीन दिन की प्लानिंग, अंडरकवर ऑपरेशन और अपने ही साथी के धोखे ने उसके ‘डॉन’ बनने के सपने को वहीं खत्म कर दिया।

यह कहानी सिर्फ एक गैंगस्टर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस रास्ते की भी सच्चाई है, जहां शुरुआत छोटी होती है लेकिन अंत हमेशा बड़ा और कड़वा होता है।

📌 यह भी पढ़ें (Trend2in Special)

टिप्पणियाँ

Trending खबरें

घड़साना शांति नर्सिंग होम मामले में 7 लोगों को लीगल नोटिस

82 RB रायसिंहनगर के आर्यन विश्नोई की पहली फिल्म “ऑफलाइन” रिलीज

रायसिंहनगर के दो युवक 101 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार, पुलिस ने कार जब्त की। फिरोजपुर से नशा लाकर सप्लाई की तैयारी थी, कार जब्त

रायसिंहनगर बस स्टैंड पर मारपीट, फल विक्रेता और यात्री भिड़े, महिलाएं भी हुईं परेशान

ईरान–इजरायल युद्ध LIVE : मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर